रांची: सीपीआई माले की छात्र इकाई “ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन” के आह्वान पर शुक्रवार को बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा घेराव के लिए सड़क पर उतरे. हाथों में मांगों के समर्थन में तख्तियां और बैनर लिए आइसा से जुड़े छात्र बिरसा मुंडा चौक से नई विधानसभा के लिए निकले, लेकिन छात्रों को पुलिस ने जगन्नाथ मंदिर के पास ही आगे बढ़ने से रोक दिया. इस दौरान भारी नारेबाजी के बीच छात्रों और पुलिस जवानों के बीच हल्की नोकझोंक और गुत्थमगुत्थी भी हुई.
इस दौरान छात्रों ने शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति का समय पर भुगतान करने, जैक द्वारा मैट्रिक और इंटर की परीक्षा शुल्क में की गई बढ़ोतरी को वापस लेने और परमानेंट एजुकेशन नंबर(PEN) की अनिवार्यता खत्म करने की मांग करते हुए नारेबाजी की. आइसा के आह्वान पर आज के विधानसभा घेराव मार्च में विभिन्न विश्वविद्यालयों, कॉलेजों और प्रोफेशनल कोर्सों के छात्र-छात्राओं ने बड़ी संख्या में अपनी भागीदारी निभाई और राज्य सरकार से छात्रों पर पढ़ाई के बढ़ते आर्थिक बोझ की ओर ध्यान आकृष्ट कराया.
आइसा ने आरोप लगाया कि राज्य में लाखों की संख्या में छात्र ऐसे हैं जिन्हें अब भी लंबित छात्रवृत्ति की भुगतान का इंतजार है. छात्रवृत्ति नहीं मिलने की वजह से छात्रों का कॉलेज फीस, रूम किराया, ट्यूशन और प्रतिदिन के खर्चों को वहन करने में कठिनाई हो रही है. आर्थिक तंगी के चलते अनेक छात्रों की पढ़ाई बाधित हो रही है, जो पूरे राज्य के भविष्य के लिए चिंताजनक है.
आइसा झारखंड की अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप ने कहा कि जैक द्वारा मैट्रिक और इंटर परीक्षा शुल्क में लगभग 25% वृद्धि किए जाने से आदिवासी, दलित, पिछड़े और वंचित समुदायों के छात्रों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है. आइसा नेताओं ने कहा कि यह निर्णय राज्य में पहले से ही अधिक ड्रॉपआउट दर को और बढ़ाने वाला कदम साबित होगा.
वहीं आइसा के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि PEN (परमानेंट एजुकेशन नंबर) की अनिवार्यता पूरी तरह से अव्यवहारिक है. उन्होंने बताया कि कई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार लगभग 20% छात्र सिर्फ PEN न होने के कारण आवेदन से वंचित हो रहे हैं. छात्रों को आवश्यक कागजात बनवाने में समय और पैसा दोनों खर्च करने पड़ रहे हैं, जिससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है. आइसा ने विधानसभा घेराव के दौरान पुलिसिया दमन का आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि आज सरकार की छात्र विरोधी मानसिकता उजागर हो गई है .
आइसा झारखंड के राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ ने कहा कि शिक्षा को सुगम, सुलभ और समान अवसरों वाला बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है. यदि सरकार छात्रों की इन अत्यंत महत्वपूर्ण समस्याओं पर तत्काल कार्रवाई नहीं करती है, तो विद्यार्थियों के साथ मिलकर आंदोलन को पूरे राज्य में और तेज किया जाएगा.
अधिकारियों के माध्यम से सीएम के नाम सौंपा मांग पत्र
मार्च के दौरान आइसा के प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री के नाम संबंधित अधिकारियों को एक चार सूत्री मांग पत्र भी सौंपा. जिसमें प्रमुख मांगें इस प्रकार हैं.
- सभी कोर्सों के छात्रों की लंबित छात्रवृत्तियों का तत्काल भुगतान और भविष्य में कोई बाधा न आए, इसकी गारंटी दी जाए.
- छात्रवृत्ति प्रक्रिया में आने वाली तकनीकी त्रुटियों और कार्यालयों के चक्कर से स्थायी मुक्ति मिले. साथ ही पर्याप्त अधिकारियों और कर्मचारियों की नियुक्ति की जाए.
- मैट्रिक और इंटर परीक्षा शुल्क में की गई वृद्धि को अविलंब वापस लिया जाए.
- PEN (परमानेंट एजुकेशन नंबर) की अनिवार्यता तुरंत समाप्त किया जाए.

आइसा के ये छात्र नेता थे प्रदर्शन में शामिल
विधानसभा घेराव के दौरान आइसा झारखंड राज्य अध्यक्ष विभा पुष्पा दीप, राज्य सचिव त्रिलोकीनाथ, राज्य पदाधिकारी संजना मेहता, विजय कुमार, स्नेहा महतो, रितेश मिश्रा, जयजीत मुखर्जी, रंजीत सिंह चेरो, राहुल राज मंडल, अमन पांडे, गुड्डू भुइंया, गौतम दांगी, नागेन्द्र राम, आशीष, जुली उरांव, रेशमी मुंडा, अनुराग रॉय, शामली, सावित्री मुंडा, आशीष प्रजापति, प्रवीण मेहता, रूपेश ने मुख्य भूमिका निभाई.


