रांची, 14 अगस्त 2026: रांची एयरपोर्ट के नजदीक जमीन के स्वामित्व को लेकर चल रहे विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से जवाब मांगा है। न्यायमूर्ति आनंद सेन की अदालत ने मंत्रालय से यह स्पष्ट करने को कहा है कि विवादित जमीन पर उसका दावा किस आधार पर है। अदालत ने दावे से संबंधित कोई अधिसूचना या दस्तावेज उपलब्ध होने पर उसे पेश करने का निर्देश दिया है।
जमीन पर यथास्थिति बनाए रखने का आदेश
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान विवादित जमीन पर मौजूदा स्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि सेना इस जमीन पर किसी तरह का निर्माण करना चाहती है तो इसके लिए पहले अदालत की अनुमति लेनी होगी।
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सुमित गाड़ोदिया ने अदालत के समक्ष पक्ष रखा।
जमीन के दस्तावेज होने का याचिकाकर्ता का दावा
मामले में नीलिमा प्रसाद ने रिट याचिका दाखिल की है। याचिका में दावा किया गया है कि एयरपोर्ट के पास स्थित जमीन उनकी है और उसके संबंध में बिक्री विलेख, म्यूटेशन तथा अद्यतन लगान रसीद मौजूद है।
याचिकाकर्ता के अनुसार, इन दस्तावेजों के बावजूद सेना की ओर से जमीन पर अपना दावा जताते हुए बोर्ड लगाया गया है। उनका कहना है कि उन्हें अपनी जमीन तक जाने में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
नोटिफिकेशन पेश करने की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत के समक्ष कहा कि यदि जमीन पर सेना या रक्षा मंत्रालय का अधिकार है तो उसके समर्थन में संबंधित अधिसूचना या अन्य वैध दस्तावेज प्रस्तुत किए जाने चाहिए।
याचिका में यह भी कहा गया है कि यदि सरकार या सेना को जमीन की आवश्यकता है और वहां निर्माण करना है, तो नियमानुसार जमीन का अधिग्रहण कर स्वामी को उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए।
फिलहाल हाईकोर्ट ने रक्षा मंत्रालय से जमीन पर दावे का आधार और उससे संबंधित दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा है तथा अगली कार्रवाई तक विवादित स्थल पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है।
