Sunday, March 29, 2026

रघुवर दास को डॉक्टरेट की मानद उपाधी से सम्मानित किया गया ,उन्होंने तेजस्वी यादव और कांवड़ विवाद पर भी जवाब दिया.

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गढ़वा: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और ओडिशा के पूर्व राज्यपाल रघुवर दास को अब डॉ. रघुवर दास के नाम से जाना जाएगा. उन्हें यह मानद डॉक्टरेट उपाधि झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार ने प्रदान की. यह सम्मान पलामू के विश्रामपुर में रामचंद्र चंद्रवंशी विश्वविद्यालय के दूसरे दीक्षांत समारोह के दौरान दिया गया. इस अवसर पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे.

दीक्षांत समारोह में रघुवर दास ने विश्वविद्यालय परिवार को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह सम्मान उनके लिए गर्व का विषय है. उन्होंने शिक्षा और सामाजिक विकास में विश्वविद्यालय की भूमिका की सराहना की. समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार ने भी विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए आत्मनिर्भरता और नैतिकता पर जोर दिया.

मीडिया से बातचीत में रघुवर दास ने बिहार के विपक्षी नेता तेजस्वी यादव के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर दिए गए बयान पर टिप्पणी की. तेजस्वी ने बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में बहिष्कार की संभावना पर गठबंधन दलों से चर्चा की बात कही थी. इस पर दास ने कहा, “कोई कितना भी गुमराह करने की कोशिश करे, जनता भटकने वाली नहीं है. जनता को अपने मताधिकार का उपयोग देश और राज्य के हित में करना चाहिए. ऐसी सरकार चुननी चाहिए जो जनता के लिए काम करे.”

रघुवर दास ने AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली के कांवड़ यात्रियों के खिलाफ दिए गए विवादित बयान की कड़ी निंदा की. शौकत अली ने कहा था कि कांवड़ियों को जेल में होना चाहिए. इस पर दास ने कहा, “ऐसे उन्मादी बयानों से जनता गुमराह नहीं होगी. यह सनातन धर्म और आस्था का सवाल है. जनता ऐसे बयानों को समझती है और इनका जवाब देती है.”

बाघमारा में हाल की हिंसा पर रघुवर दास ने झारखंड सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए. उन्होंने कहा, “यह सरकार की कमजोरी है. ऐसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को पहले से सचेत रहना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं हुआ.” उन्होंने सरकार से इस तरह के मुद्दों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की.

झारखंड भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के चयन के सवाल पर रघुवर दास ने संक्षिप्त जवाब देते हुए कहा, ” भाजपा में पद मांगा नहीं जाता, पद मिलता है.” उन्होंने इस मुद्दे पर ज्यादा टिप्पणी करने से परहेज किया.

दीक्षांत समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद थी. स्थानीय प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए थे. समारोह में बड़ी संख्या में विद्यार्थी, शिक्षक और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे.

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