Sunday, April 12, 2026

यूपीआई ने 10 साल पूरे किए और भारत अब दुनिया के 49% रियल-टाइम डिजिटल लेनदेन को अकेले संभाल रहा है.

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भारत के स्वदेशी डिजिटल भुगतान माध्यम ‘यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस’ (यूपीआई) ने आज अपनी स्थापना के 10 गौरवशाली वर्ष पूरे कर लिए हैं. इस विशेष अवसर पर सरकार द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारत अब दुनिया के कुल रियल-टाइम (तत्काल) डिजिटल लेनदेन में अकेले 49 प्रतिशत की हिस्सेदारी रखता है. यह उपलब्धि भारत को वैश्विक डिजिटल भुगतान के नक्शे पर सबसे शीर्ष स्थान पर स्थापित करती है.

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस भुगतान प्रणाली ने सिर्फ जनवरी 2026 के महीने में ही 21.70 अरब (2170 करोड़) ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए, जिनका कुल मूल्य 28.33 लाख करोड़ रुपये दर्ज किया गया. वर्तमान में भारत के कुल खुदरा (रिटेल) डिजिटल लेनदेन में यूपीआई की हिस्सेदारी 81 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है.

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) और विश्व बैंक जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी भारत के इस बुनियादी ढांचे की सराहना की है. आईएमएफ ने यूपीआई को वॉल्यूम (लेनदेन की संख्या) के हिसाब से दुनिया का सबसे बड़ा रियल-टाइम पेमेंट सिस्टम करार दिया है. इस पूरे तंत्र को भारत ने महज एक दशक के भीतर विकसित और स्थापित किया है.

शुरुआत से लेकर अब तक यूपीआई ने लेनदेन की संख्या (वॉल्यूम) में 12,000 गुना और मूल्य (वैल्यू) के मामले में 4,000 गुना से अधिक की अविश्वसनीय बढ़त दर्ज की है. सरकार के आधिकारिक बयान में कहा गया कि यूपीआई का असली प्रभाव सिर्फ इन बड़े आंकड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसकी वास्तविक सफलता ग्रामीण हाट-बाजारों, रेहड़ी-पटरी वालों और ऑटो चालकों तक इसकी पहुंच में निहित है. इसने अमीर-गरीब और शहरी-ग्रामीण के बीच के डिजिटल अंतर को पूरी तरह समाप्त कर दिया है.

भारत का यह स्वदेशी मॉडल अब दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है. भारत के बाहर भी इसका तेजी से विस्तार हो रहा है. वर्तमान में संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सिंगापुर, फ्रांस, मॉरीशस, भूटान, नेपाल, श्रीलंका और कतर जैसे देशों में यूपीआई की सेवाएं शुरू हो चुकी हैं. इससे विदेशों में यात्रा करने वाले भारतीयों को भुगतान करने और सीमा पार प्रेषण में काफी आसानी हो रही है.

पेमेंट के साथ-साथ अब यूपीआई एक बड़े वित्तीय मंच के रूप में उभर रहा है. छोटे और बिना पिन वाले भुगतानों के लिए ‘यूपीआई लाइट’ और समय-समय पर होने वाले बिलों व सब्सक्रिप्शन के लिए ‘यूपीआई ऑटोपे’ जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं. इसके अलावा बैंकिंग और फिनटेक कंपनियों के माध्यम से अब ग्राहकों को प्री-अप्रूव्ड क्रेडिट लाइन और लोन की सुविधा भी इसके जरिए मिलने लगी है.

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