Monday, March 16, 2026

यूनियन बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का ऐलान किया है.

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 यूनियन बजट 2026-27 में केंद्र सरकार ने अगले वित्त वर्ष के लिए 17.2 लाख करोड़ रुपये का कर्ज लेने का ऐलान किया है. यह अब तक का सबसे बड़ा उधार है और बाजार के अनुमान से भी अधिक है. इस घोषणा के बाद बॉन्ड बाजार में हलचल तेज हो गई है और निवेशकों में चिंता बढ़ी है कि बढ़ती सप्लाई से बॉन्ड यील्ड पर दबाव बना रह सकता है.

मौजूदा साल के मुकाबले 17 फीसदी ज्यादा कर्ज
बजट आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष में सरकार का कुल उधार 14.61 लाख करोड़ रुपये है. अगले वित्त वर्ष में यह बढ़कर 17.2 लाख करोड़ रुपये हो जाएगा, यानी करीब 17 फीसदी की बढ़ोतरी. वहीं शुद्ध उधार भी बढ़कर 11.73 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है. यह संकेत देता है कि सरकार की उधारी जरूरतें अभी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं.

बाजार के अनुमान से ज्यादा निकला आंकड़ा
बजट से पहले बाजार को उम्मीद थी कि सरकार 16 से 17.5 लाख करोड़ रुपये के बीच कर्ज ले सकती है. अर्थशास्त्रियों के सर्वे में औसत अनुमान करीब 16.3 लाख करोड़ रुपये का था. लेकिन सरकार द्वारा घोषित 17.2 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा इन अनुमानों से ऊपर है, जिससे बॉन्ड बाजार पर अतिरिक्त दबाव की आशंका बढ़ गई है.

बॉन्ड यील्ड पर बढ़ता दबाव
पिछले कुछ महीनों से केंद्र और राज्य सरकारों की भारी उधारी के कारण सरकारी बॉन्ड यील्ड पहले ही ऊंचे स्तर पर है. अब निवेशकों को डर है कि बॉन्ड की बढ़ती सप्लाई से 10 साल के सरकारी बॉन्ड की यील्ड में और तेजी आ सकती है. इसका असर कर्ज की लागत और बाजार की धारणा पर भी पड़ सकता है.

आरबीआई की भूमिका अहम
भारतीय रिजर्व बैंक ने बॉन्ड बाजार को सहारा देने के लिए हाल के महीनों में बड़े पैमाने पर बॉन्ड खरीद और फॉरेक्स स्वैप जैसे कदम उठाए हैं. बावजूद इसके, विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ती उधारी के बीच आगे का रुख काफी हद तक आरबीआई की नीतियों पर निर्भर करेगा.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि उधार का बड़ा आकार और बॉन्ड की मांग बढ़ाने के लिए ठोस उपायों की कमी बाजार पर दबाव बढ़ा सकती है. बजट का फोकस आर्थिक विकास, घरेलू उद्योग और निर्यात को मजबूत करने पर है. हालांकि, उधारी उम्मीद से ज्यादा होने के कारण बॉन्ड सप्लाई बढ़ेगी, जिसका असर यील्ड पर दिख सकता है.

घाटा नियंत्रण का लक्ष्य बरकरार
सरकार ने साफ किया है कि वह कर्ज-से-जीडीपी अनुपात को अगले वित्त वर्ष में 55.6 फीसदी तक लाना चाहती है. इसके साथ ही राजकोषीय घाटे को जीडीपी के 4.3 फीसदी तक सीमित रखने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का कहना है कि विकास और वित्तीय अनुशासन के बीच संतुलन बनाए रखने की कोशिश जारी रहेगी.

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