बिहार में कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) के तहत 532 प्रशिक्षण केंद्र जांच के दायरे में हैं। युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने अनियमितताओं और गुणवत्ता की कमी की शिकायतों के बाद यह फैसला लिया है। जांच के आधार पर मान्यता रद्द की जाएगी और छात्रों को अन्य केंद्रों पर स्थानांतरित किया जाएगा। मंत्री संजय सिंह टाइगर ने युवाओं के भविष्य से कोई समझौता न करने की बात कही है। प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में सुधार कर इंडस्ट्री की मांग के अनुरूप बनाया जाएगा।
पटना। बिहार में कुशल युवा कार्यक्रम (KYP) के तहत 1832 प्रशिक्षण केंद्र स्वीकृत हैं। इनमें से 1709 केंद्रों पर युवाओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम चल रहा है।
लेकिन, युवाओं को प्रशिक्षण देने में कई प्रकार की गड़बड़ियां सामने आई हैं। इसे गंभीरता से लेते हुए युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने केंद्रों का जांच करने और उसके आधार पर तत्काल मान्यता रद करने और वहां के छात्रों को समीप के अन्य केंद्रों पर शिफ्ट कर प्रशिक्षण दिलाने का बड़ा फैसला किया है।
जांच टीम में जिला कौशल प्रबंधक व नोडल पदाधिकारी शामिल
जांच टीम में जिला कौशल प्रबंधक और नोडल पदाधिकारी शामिल किए गए हैं। विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक सबसे पहले 532 कौशल विकास प्रशिक्षण केंद्रों की जांच कराई जा रही है
इन केंद्रों पर प्रशिक्षण में गुणवत्ता की कमी की शिकायतें मिली हैं। जांच के आधार पर सबसे पहले इन केंद्रों पर कार्रवाई की जाएगी।
इनमें से अधिकांश केंद्र जमुई, मुंगेर, बांका, नवादा, शेखपुरा, सारण, सिवान, गोपालगंज, पूर्वी चंपारण, पश्चिमी चंपारण, कटिहार, किशनगंज, मधेपुरा, सहरसा, खगड़िया, अररिया, पूर्णिया, दरभंगा और रोहतास समेत कुछ अन्य जिलों में हैं।
एक से ज्यादा प्रशिक्षण केंद्रों का संचालन करने वालों की विशेष निगरानी
युवा, रोजगार एवं कौशल विकास मंत्री संजय सिंह टाइगर ने कहा है कि युवाओं के भविष्य से कोई समझौता नहीं होगा और कौशल विकास कार्यक्रमों की गुणवत्ता एवं पारदर्शिता सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।
अगर इसमें किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाएगी तो कौशल विकास केंद्रों व उससे संबंधित संस्थानों का पंजीकरण रद करने के साथ नियमानुकूल संचालकों पर भी कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने एक से अधिक कौशल विकास केंद्रों का संचालन करने वालों की विशेष निगरानी करने का आदेश दिया है। इसके लिए उन्होंने प्रशिक्षण केंद्रों की वास्तविक स्थिति की जांच कर कार्रवाई करने को कहा है।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ होगा सुधार भी
दो अक्टूबर 2016 से संचालित कुशल युवा कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षण लेने वालों के लिए न्यूनतम योग्यता दसवीं है, लेकिन इसमें निशुल्क प्रशिक्षण लेने वालों में बड़ी संख्या में इंटर व स्नातक उत्तीर्ण, आईटीआई, पाॅलिटेक्निक डिप्लोमा धारक हैं।
इसलिए युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग ने प्रशिक्षण में बड़े स्तर पर सुधार लाने का फैसला किया है। इंडस्ट्री-डिमांड के अनुसार युवाओं को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में कुछ बदलाव के साथ सुधार किया जाएगा, जिससे युवाओं को नौकरी पाने में आसानी होगी। इसके लिए बिहार कौशल विकास मिशन द्वारा इस कार्यक्रम से जुड़े सभी 16 विभागों से समन्वय बनाकर कार्य योजना तैयार की जा रही है।
विभाग के सचिव डा. कौशल किशोर कार्य योजना को अंतिम रूप देने में जुटे हैं ताकि प्रशिक्षण केंद्रों की खामियां को दुरुस्त भी किया जा सके।
ज्यादा कमाई के चक्कर में पढ़ाई से समझौता, बड़े सर्जरी की जरूरत
राज्य में करीब दो सौ से ज्यादा ऐसे संचालक हैं, जो एक से अधिक प्रशिक्षण केंद्र चला रहे हैं, ताकि ज्यादा कमाई हो सके। इस चक्कर में युवाओं के शिक्षण-प्रशिक्षण में गुणवत्ता से समझौता किए जाने की शिकायतें हैं।
विभाग के मुताबिक भौतिक सत्यापन के आधार पर एक प्रशिक्षण केंद्र पर न्यूनतम 20 और अधिकतम 30 युवाओं का बैच चलाने का निर्देश है।
एक केंद्र को तीन माह का बैच के लिए 120 युवाओं को प्रशिक्षण देने का मानक तय है। प्रशिक्षणार्थियों के उत्तीर्ण होने पर प्रति छात्र 8650 रुपये की राशि दी जाती है।
इस प्रकार एक बैच में सभी 120 युवाओं के पास करने पर केंद्र संचालक को 10.38 लाख रुपये मिलता है। अगर एक केंद्र साल में चार बैच संचालित करता है तो उसे 41.52 लाख रुपये का भुगतान होता है।
कौशल विकास कार्यक्रम में 15 से 28 वर्ष के युवाओं को व्यवहार, संवाद (हिंदी/अंग्रेजी) और बुनियादी कंप्यूटर कौशल का निशुल्क प्रशिक्षण दिया जाता है।
इसमें दिव्यांगों के लिए उम्र सीमा 33 वर्ष तक है। प्रशिक्षण के लिए बिहार का स्थायी निवासी होना अनिवार्य है। प्रशिक्षण पूरा करने पर प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है।
विभाग के मुताबिक अब तक प्रशिक्षण हेतु 31 लाख 32 हजार 48 युवाओं ने पंजीकरण कराया है। इनमें से 19 लाख 82 हजार 898 युवाओं को प्रशिक्षण प्रमाण पत्र मिल चुका है।


