रांचीः झारखंड में शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आदिवासी समाज की भागीदारी लगातार मजबूत हो रही है. खासकर तकनीकी और उच्च शिक्षा जैसे क्षेत्रों में आदिवासी युवाओं की उपलब्धियां राज्य के लिए गर्व का विषय बनती जा रही हैं.
इसी कड़ी में ट्रिपल आईटी (IIIT), रांची में पीएचडी के लिए चयनित आदिवासी समुदाय की सबसे कम उम्र की अभ्यर्थी सविता कच्छप की उपलब्धि ने न केवल राज्य बल्कि आदिवासी समाज के युवाओं के लिए नई प्रेरणा प्रस्तुत की है.
डूंगरी टोली, अरगोड़ा (रांची) की रहने वाली सविता कच्छप वर्तमान में मधुकम स्थित अपनी नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रही हैं. महज 24 वर्ष की उम्र में उन्होंने ट्रिपल आईटी, रांची के इलेक्ट्रिक कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग कोर्स में पीएचडी के लिए चयनित होकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है.
तकनीकी क्षेत्र में वे पहली ट्राइबल रिसर्च स्कॉलर भी हैं. इतना ही नहीं, सविता कच्छप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर IEEE प्लेटफॉर्म पर अपना नॉवेल्टी रिसर्च वर्क प्रस्तुत कर चुकी हैं, जो उनके शोध कार्य की गुणवत्ता और वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है. इसी पृष्ठभूमि में सोमवार को कांके रोड स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में सीएम हेमंत सोरेन से सविता कच्छप ने शिष्टाचार मुलाकात की.

इस दौरान मुख्यमंत्री ने सविता कच्छप को उनकी उपलब्धि के लिए हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आदिवासी समाज की बेटियां आज हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही हैं और सविता कच्छप जैसी प्रतिभाएं राज्य के लिए मिसाल हैं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सविता कच्छप की हौसला अफजाई करते हुए राज्य सरकार की ओर से पीएचडी की पढ़ाई पूरी करने के लिए 2 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का चेक उनके परिजन को सौंपा.
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार शिक्षा और शोध के क्षेत्र में आगे बढ़ने वाले विद्यार्थियों के साथ मजबूती से खड़ी है और उन्हें हरसंभव सहयोग प्रदान किया जाएगा. मुख्यमंत्री ने सविता कच्छप से बातचीत के दौरान कहा कि वे पूरे मनोयोग से अपनी पढ़ाई और शोध कार्य जारी रखें. तकनीकी और रिसर्च जैसे क्षेत्रों में आदिवासी युवाओं की भागीदारी राज्य के विकास के लिए बेहद जरूरी है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार भविष्य में भी उनके शोध कार्यों को सहयोग देने के लिए तत्पर रहेगी.
इस मुलाकात के दौरान सविता कच्छप ने मुख्यमंत्री को अपनी शैक्षणिक यात्रा और शोध कार्यों के बारे में जानकारी दी. उन्होंने बताया कि आदिवासी समुदाय से होने के बावजूद उन्होंने तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प लिया और आज उसी का परिणाम है कि वे ट्रिपल आईटी रांची में पीएचडी रिसर्च स्कॉलर के रूप में चयनित हुई हैं. सविता ने कहा कि मुख्यमंत्री और राज्य सरकार से मिले इस प्रोत्साहन से उनका आत्मविश्वास और बढ़ा है.
इस अवसर पर सविता कच्छप के परिजन भी मौजूद रहे. परिजनों ने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सरकार के इस सहयोग से न केवल सविता बल्कि आदिवासी समाज के अन्य बच्चों को भी आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलेगी. सविता कच्छप की यह उपलब्धि झारखंड में शिक्षा, अनुसंधान और तकनीकी क्षेत्र में आदिवासी युवाओं की बढ़ती भागीदारी का प्रतीक है. राज्य सरकार द्वारा दिया गया यह सम्मान और आर्थिक सहयोग यह संदेश देता है कि प्रतिभा को जाति, वर्ग या पृष्ठभूमि से नहीं, बल्कि मेहनत और क्षमता से पहचाना जाता है.



