नई दिल्ली: रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने दिल्ली में आयोजित ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ से बड़ी घोषणा की है. उन्होंने अगले सात वर्षों में 10 लाख करोड़ रुपये के भारी-भरकम निवेश का एलान किया है. इस निवेश का मुख्य उद्देश्य भारत को ‘इंटरनेट युग’ से निकालकर ‘इंटेलिजेंस युग’ में ले जाना है.
जियो का नया अवतार: ‘जियो इंटेलिजेंस’
अंबानी ने साफ किया कि जिस तरह जियो ने 2016 में सस्ता डेटा देकर मोबाइल क्रांति की थी, उसी तरह अब ‘जियो इंटेलिजेंस’ के जरिए एआई (AI) को हर भारतीय की पहुंच में लाया जाएगा. उन्होंने कहा, “दुनिया आज एआई के मामले में दो रास्तों पर खड़ी है—एक रास्ता महंगे और नियंत्रित डेटा का है, जबकि दूसरा रास्ता किफायती और सुलभ एआई का है. हम दूसरे रास्ते को चुन रहे हैं.”
जामनगर बनेगा एआई का केंद्र
इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च होगा. रिलायंस गुजरात के जामनगर में 1 गीगावाट क्षमता का दुनिया का सबसे बड़ा एआई-रेडी डेटा सेंटर बनाएगा. खास बात यह है कि यह पूरा सेंटर रिलायंस की अपनी ग्रीन एनर्जी (हरित ऊर्जा) से संचालित होगा, जिससे एआई कंप्यूटिंग की लागत को न्यूनतम रखा जा सकेगा.
‘राष्ट्र-निर्माण’ के लिए पूंजी
अंबानी ने इस निवेश को ‘पेशेंट कैपिटल’ यानी धैर्यवान पूंजी बताया. उन्होंने कहा कि यह निवेश किसी कंपनी की वैल्यूएशन बढ़ाने या सट्टेबाजी के लिए नहीं है, बल्कि यह राष्ट्र-निर्माण के लिए है. उनका लक्ष्य है कि भारत को एआई के लिए विदेशी कंपनियों पर निर्भर न रहना पड़े और देश का अपना ‘सॉवरेन कंप्यूट इंफ्रास्ट्रक्चर’ हो.
रोजगार और शिक्षा पर असर
अक्सर एआई को नौकरियों के लिए खतरा माना जाता है, लेकिन अंबानी ने इसे लेकर सकारात्मक रुख अपनाया. उन्होंने कहा कि एआई से नौकरियां खत्म नहीं होंगी, बल्कि यह लोगों की कार्यक्षमता बढ़ाएगा और नए उच्च-कौशल वाले रोजगार पैदा करेगा. जियो का लक्ष्य स्वास्थ्य, शिक्षा और कृषि जैसे क्षेत्रों में एआई आधारित समाधानों को घर-घर पहुंचाना है.
मुकेश अंबानी की यह घोषणा न केवल रिलायंस के लिए बल्कि पूरे भारत के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकती है. यदि यह योजना सफल होती है, तो भारत दुनिया का सबसे सस्ता और सुलभ एआई हब बनकर उभर सकता है.


