Saturday, March 7, 2026

मिडिल ईस्ट संकट के बीच भारत के पास 1.5 करोड़ बैरल रूसी तेल पहुंचा; अमेरिका से मिली विशेष छूट के बाद तेल आपूर्ति बहाल.

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नई दिल्ली: वैश्विक ऊर्जा बाजार में मची भारी उथल-पुथल के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है. शिपिंग ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) बैरल से अधिक रूसी कच्चा तेल वर्तमान में भारतीय तटों के बेहद करीब, अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में तैर रहा है. यह तेल भारत को मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) से होने वाली आपूर्ति में आई भारी कमी को पूरा करने में मदद करेगा.

अमेरिका का यू-टर्न और अस्थायी लाइसेंस
यूक्रेन युद्ध के बाद से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने भारत पर रूसी तेल खरीदने को लेकर लगातार दबाव बनाया था, जिसके चलते भारत ने पिछले कुछ महीनों में रूस से आयात काफी कम कर दिया था. हालांकि, मध्य पूर्व में ईरान और अन्य देशों के बीच बढ़ते तनाव और ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ के प्रभावित होने से तेल की वैश्विक सप्लाई चेन टूट गई है.

इस ऊर्जा संकट को देखते हुए, वॉशिंगटन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए भारत को एक महीने का ‘विशेष छूट’ वाला लाइसेंस जारी किया है. इसके तहत भारत उन रूसी जहाजों से तेल खरीद सकता है जो पहले से समुद्र में हैं. यह फैसला वैश्विक तेल कीमतों को नियंत्रित करने और भारत की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है.

समुद्र में कतार में खड़े हैं जहाज
ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के मुताबिक, एक दर्जन से अधिक टैंकर वर्तमान में भारतीय सीमाओं के पास मंडरा रहे हैं. ये वे कार्गो हैं जिनका या तो अभी तक कोई खरीदार नहीं था या जिनका गंतव्य तय नहीं था. ये जहाज एक सप्ताह से भी कम समय में भारतीय रिफाइनरियों तक पहुंच सकते हैं. इसके अलावा, सिंगापुर के पास भी 8 जहाज खड़े हैं जिनमें लगभग 70 लाख बैरल ‘यूराल’ तेल लदा है. इतना ही नहीं, स्वेज नहर और भूमध्य सागर के रास्ते भी कई रूसी जहाज भारत की ओर बढ़ रहे हैं, जो एक महीने के भीतर पहुंच जाएंगे.

कीमतों में उछाल और बाजार का बदलता रुख
डेटा इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार, अमेरिका से हरी झंडी मिलने से पहले ही कई रूसी टैंकरों ने अपना मार्ग बदलकर भारत की ओर रुख करना शुरू कर दिया था. विशेषज्ञों का मानना है कि भारत अब रूस से रोजाना 20 लाख बैरल से ज्यादा तेल आयात कर सकता है.

दिलचस्प बात यह है कि जो रूसी कच्चा तेल पहले भारी छूट (डिस्काउंट) पर मिलता था, अब उसकी मांग बढ़ने से वह महंगा हो गया है. भारतीय रिफाइनरियों (जैसे IOC, BPCL) ने हाल के दिनों में लगभग 1 करोड़ बैरल यूराल तेल खरीदा है, जिसके लिए उन्हें पिछले हफ्तों के मुकाबले प्रति बैरल $12 तक अधिक कीमत चुकानी पड़ी है.

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