Monday, February 9, 2026

महिलाओं के लिए चलने वाली विशेष पिंक बसों की स्टेयरिंग जल्द ही महादलित महिलाओं के हाथों में होंगी।

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बिहार में जल्द ही महादलित महिलाएं पिंक बसों की स्टेयरिंग संभालेंगी। पहले चरण में छह महिलाओं को औरंगाबाद के IDTR में विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण के बाद ये पटना की सड़कों पर बसें चलाएंगी, जिससे महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार सृजन को बढ़ावा मिलेगा। परिवहन मंत्री 14 फरवरी को इनका नियोजन करेंगे। यह पहल महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

पटना। महिलाओं के लिए चलने वाली विशेष पिंक बसों की स्टेयरिंग जल्द ही महादलित महिलाओं के हाथों में होंगी।

पहले चरण में छह महिलाएं पिंक बस चलाने के लिए चुनी गई हैं, जिनमें आरती कुमारी, रागिनी कुमारी, अनीता कुमारी, सरस्वती कुमारी, गायत्री कुमारी और बेबी कुमारी शामिल हैं।

यह सभी हेवी मोटर व्हीकल (एलएमवी) ड्राइविंग लाइसेंसधारक हैं। परिवहन विभाग पिंक बस चलाने के लिए सभी को औरंगाबाद स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आइडीटीआर) में विशेष प्रशिक्षण दे रहा है।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं पटना की सड़कों पर पिंक बस चलाती नजर आएंगीं। आगामी 14 फरवरी को पटना स्थित अधिवेशन भवन में परिवहन मंत्री श्रवण कुमार इनका नियोजन करेंगे।

बिहार राज्य पथ परिवहन निगम (बीएसआरटीसी) के अनुसार, इनके अलावा आइडीटीआर में 13 अन्य महिला चालक भी एचएमवी प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं।

वर्तमान में निगम की ओर से सभी 100 पिंक बसों में महिला कंडक्टर तैनात हैं, जो महिलाओं को सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित कर रही हैं। अब ड्राइवरों को भी महिला बनाने से यह सेवा पूरी तरह महिला-केंद्रित हो जाएगी, जो महिलाओं की सुरक्षा और रोजगार सृजन दोनों दृष्टि से सराहनीय है।

महिलाएं बोलीं, पिंक बस चलाकर तानों को दूंगी जवाब

पिंक बस चलाने के लिए चुनी गईं गायत्री कुमारी घर की सबसे बड़ी बेटी हैं। वह कहती हैं, गाड़ी चलाने का प्रशिक्षण लेने के दौरान लोगों ने काफी ताने मारे थे कि ये कुछ नहीं कर पाएगी मगर अब पिंक बस चलाकर इन्हें जवाब मिल जाएगा। घर की कुछ जिम्मेदारियां भी हैं, जो पैसे मिलने पर पूरी कर सकूंगी और अपनी पढ़ाई भी करूंगी

भोजपुर की 22 वर्षीय आरती कुमारी ने कहा कि पहले पुरुषों को गाड़ी चलाते देख लगता था यह काम सिर्फ उनका है। लेकिन अब खुद सीख गई हूं तो कुछ भी नामुमकिन नहीं लगता। पुनपुन की रागिनी कुमारी ने भी कहा कि वह पिंक बस चलाने के साथ-साथ अपनी पढ़ाई भी जारी रखेंगी।

सरस्वती कुमारी कहती हैं, शादी के बाद ससुराल वालों को मनाना आसान नहीं था, क्योंकि समाज में बस चलानापुरुषों का काम माना जाता है, लेकिन पति ने पूरा साथ दिया। अब पिंक बस चालक बनने से रोजगार मिलेगा, कमाई होगी और उस पैसे से अपना घर बनाऊंगी।

चार नए आईडीटीआर खोलने का प्रस्ताव : मंत्री

परिवहन मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने महिला सशक्तिकरण के लिए यह महत्वपूर्ण पहल की है। उनकी सोच है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे बढ़ें।

उन्होंने आगे बताया कि अब राज्य के चार अन्य जिलों सुपौल, बांका, मोतिहारी और नालंदा में भी इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च (आईडीटीआर) स्थापित करने के लिए भारत सरकार को प्रस्ताव भेज दिया गया है। इन केंद्रों के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को वाहन चलाने का पेशेवर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

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