शारदीय नवरात्र 2025 की शुरुआत 22 सितंबर से हुई और यह 1 अक्टूबर तक चलेगी. नवरात्र के समापन के बाद 2 अक्टूबर को दशहरा मनाया जाएगा. नवरात्र में अष्टमी और नवमी का विशेष महत्व माना जाता है. इस बार दुर्गा अष्टमी 30 सितंबर, मंगलवार और महानवमी 1 अक्टूबर, बुधवार को है.
महाअष्टमी पर कन्या पूजन के शुभ मुहूर्त: पंडित विजय शंकर मिश्र के अनुसार, महाअष्टमी पर कन्या पूजन और हवन का आयोजन करना अत्यंत फलदायी माना जाता है. कल कन्या पूजन के लिए मुख्य शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं:
- पहला मुहूर्त: सवेरे 5:01 बजे से 6:13 बजे तक
- दूसरा मुहूर्त: सवेरे 10:41 बजे से दोपहर 12:11 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सवेरे 11:47 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक
पंडित विजय शंकर मिश्र के अनुसार, “सर्वप्रथम ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें. हवन कुंड को अच्छे से साफ करें और गंगाजल का छिड़काव करें. आम की लकड़ी, घी और कपूर से अग्नि प्रज्वलित करें और देवी दुर्गा का ध्यान करते हुए कम से कम 108 बार आहुति डालें. शेष हवन सामग्री को पान के पत्ते में रखें और उसमें पूरी, हलवा, चना, सुपारी व लौंग डालकर आहुति अर्पित करें. अंत में माता की आरती करें और भोग लगाएँ.”
कन्या पूजन का विधान: पंडित मिश्र ने बताया, “कन्याओं को एक दिन पहले आमंत्रित करें. उनके पांव को साफ जल, दूध व पुष्पजल से धोकर तिलक करें. इसके बाद उन्हें भोजन कराएं और उपहार देकर उनके चरणों को छूकर आशीर्वाद लें. यह परंपरा न केवल माता रानी की कृपा दिलवाती है, बल्कि घर में सुख-समृद्धि भी लाती है.”
महाअष्टमी और महानवमी के दिन धार्मिक कार्यों का महत्व अधिक माना जाता है. अष्टमी पर कन्या पूजन और हवन से परिवार में सौभाग्य और समृद्धि आती है. पंडित विजय शंकर मिश्र का कहना है कि इन दिनों किए गए धार्मिक कर्मों का फल पूरे वर्ष मिलता है.
विशेष रूप से, नवरात्र में हवन के दौरान 108 आहुति और देवी दुर्गा का ध्यान अत्यंत महत्वपूर्ण होता है. पंडित मिश्र ने सलाह दी कि हवन के समय सभी साधनों को शुद्ध रखें और कन्या पूजन में पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ भाग लें. इस वर्ष शारदीय नवरात्र में अष्टमी और नवमी पर पूजा-पाठ और हवन का आयोजन करने से न केवल व्यक्तिगत जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है, बल्कि घर और समाज में भी खुशहाली का संचार होता है.


