भारतीय आईटी जगत की दिग्गज कंपनी इंफोसिस ने आज तकनीकी दुनिया में एक बड़ा धमाका किया है. जिस अमेरिकी एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक के नए टूल्स ने कुछ दिन पहले वैश्विक आईटी शेयरों में भारी गिरावट पैदा की थी, उसी के साथ इंफोसिस ने एक रणनीतिक साझेदारी का एलान कर दिया है. इस घोषणा के बाद शेयर बाजार में जबरदस्त उत्साह देखा गया और इंफोसिस के शेयरों ने पिछले कई दिनों की गिरावट पर ब्रेक लगाते हुए जोरदार वापसी की है.
बाजार की उथल-पुथल और इंफोसिस का पलटवार
फरवरी महीने की शुरुआत आईटी सेक्टर के लिए काफी डरावनी रही थी. 3 फरवरी को एंथ्रोपिक द्वारा एक उन्नत लीगल एआई टूल और क्लाउड कोड लॉन्च करने के बाद निवेशकों में यह डर बैठ गया था कि एआई अब कोडिंग और परामर्श जैसे पारंपरिक आईटी कार्यों की जगह ले लेगा. इस डर के कारण इंफोसिस का शेयर जो कभी 1,728 रुपये के करीब था, लुढ़ककर 1,281 रुपये के निचले स्तर पर आ गया था.
लेकिन मंगलवार को इस साझेदारी की खबर ने निवेशकों के घावों पर मरहम का काम किया. शेयर सुबह 1,370 रुपये पर खुलकर तेजी से ऊपर चढ़े और इंट्रा-डे में 1,411 रुपये का हाई छुआ. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि इंफोसिस ने ‘खतरे’ को अपना ‘साझेदार’ बनाकर निवेशकों को यह संदेश दिया है कि भारतीय आईटी कंपनियां एआई से डरने के बजाय उसे अपना रही हैं.
करार की मुख्य बातें: ‘एजेंटिक एआई’ पर फोकस
इंफोसिस और एंथ्रोपिक के बीच यह समझौता केवल एक साधारण तकनीकी आदान-प्रदान नहीं है. इसके तहत इंफोसिस अपने एआई-फर्स्ट प्लेटफॉर्म ‘Topaz’ के साथ एंथ्रोपिक के अत्याधुनिक ‘Claude’ मॉडल का एकीकरण करेगी.
सेंटर ऑफ एक्सीलेंस: दोनों कंपनियां मिलकर एक समर्पित ‘Anthropic Center of Excellence’ की स्थापना करेंगी. इसका प्राथमिक उद्देश्य ऐसे ‘एआई एजेंट्स’ बनाना है जो उद्योगों की विशिष्ट समस्याओं को स्वतंत्र रूप से हल कर सकें.
क्षेत्र-विशिष्ट समाधान: यह साझेदारी मुख्य रूप से दूरसंचार , वित्तीय सेवा, विनिर्माण और सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट जैसे विनियमित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेगी.
एजेंटिक एआई: यह तकनीक सामान्य चैटबॉट से कहीं आगे है. ये ऐसे सिस्टम हैं जो केवल सवालों के जवाब नहीं देते, बल्कि जटिल मल्टी-स्टेप टास्क (जैसे क्लेम प्रोसेस करना या कोडिंग टेस्ट करना) को खुद पूरा कर सकते हैं.
विभिन्न क्षेत्रों पर इसका प्रभाव
सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट: डेवलपर्स अब ‘Claude Code’ का उपयोग करके कोडिंग की रफ्तार को कई गुना बढ़ा सकेंगे. इससे प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का समय और लागत दोनों कम होंगे.
बैंकिंग और फाइनेंस: एआई एजेंट अब रिस्क मैनेजमेंट और जटिल कंप्लायंस रिपोर्टिंग को स्वचालित (Automate) करेंगे, जिससे मानवीय गलतियों की संभावना न्यूनतम हो जाएगी.
मैन्युफैक्चरिंग
एंथ्रोपिक की एआई क्षमताएं प्रोडक्ट डिजाइन और सिमुलेशन में मदद करेंगी, जिससे कंपनियों को बाजार में नए उत्पाद उतारने में कम समय लगेगा.
इंफोसिस के सीईओ सलिल पारेख ने इस समझौते को एक मील का पत्थर बताते हुए कहा, “हमारा लक्ष्य संयुक्त विशेषज्ञता का लाभ उठाकर वैश्विक उद्यमों के लिए एआई की उपयोगिता को वास्तविकता में बदलना है.” वहीं, एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई ने भारतीय आईटी सेक्टर की डोमेन विशेषज्ञता की सराहना करते हुए कहा कि इंफोसिस के पास वह अनुभव है जो जटिल उद्योगों में एआई को लागू करने के लिए जरूरी है.


