मुंबई: पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को खोलने के लिए दी गई समय सीमा के कारण भारतीय शेयर बाजारों में मंगलवार को भारी गिरावट दर्ज की गई. शुरुआती कारोबार में प्रमुख सूचकांकों—सेंसेक्स और निफ्टी—में 1 प्रतिशत से अधिक की गिरावट देखी गई, जिससे निवेशकों में घबराहट का माहौल पैदा हो गया.
बाजार का प्रदर्शन और प्रमुख गिरावट
सेंसेक्स सुबह 372 अंक गिरकर 73,734 पर खुला, लेकिन बिकवाली के दबाव में यह जल्द ही 1.11 प्रतिशत या 824 अंक टूटकर 73,282 के निचले स्तर पर आ गया. इसी तरह, निफ्टी भी 248 अंक फिसलकर 22,719 के स्तर पर पहुंच गया. बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल रहा, जिसमें ऑटो, रियल एस्टेट, फार्मा और बैंकिंग सेक्टर में सबसे ज्यादा मार पड़ी. प्रमुख शेयरों में इंडिगो (IndiGo), एमएंडएम (M&M), आयशर मोटर्स और अपोलो हॉस्पिटल्स सबसे ज्यादा टूटने वाले शेयरों में शामिल रहे.
गिरावट के पीछे मुख्य कारण
अमेरिकी अल्टीमेटम: राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान को हॉर्मुज जलडमरूमध्य खोलने के लिए 48 घंटे का अल्टीमेटम दिया है, जो भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह समाप्त हो रहा है. इसके उल्लंघन पर सख्त सैन्य कार्रवाई की चेतावनी ने वैश्विक बाजारों को डरा दिया है.
कच्चे तेल में उबाल: हॉर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल गुजरता है. इस मार्ग के बाधित होने की आशंका से ब्रेंट क्रूड 1.69% बढ़कर 111.63 डॉलर और अमेरिकी डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड 3% की उछाल के साथ 115.64 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया है.
विदेशी निवेशकों की निकासी: सोमवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय बाजार से 8,167 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी की, जिससे बाजार की धारणा कमजोर हुई. हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने 8,000 करोड़ रुपये की खरीदारी कर बाजार को संभालने की कोशिश की.
बाजार विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान गिरावट पूरी तरह से वैश्विक अनिश्चितता से प्रेरित है. उनका कहना है कि निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है. जब तक निफ्टी और सेंसेक्स प्रमुख प्रतिरोध स्तरों (Resistance zones) को पार नहीं करते, तब तक बाजार में अस्थिरता बनी रहेगी. व्यापारियों को सलाह दी गई है कि वे नई पोजीशन लेने से पहले वैश्विक संकेतों और बुधवार को आने वाले आरबीआई (RBI) के मौद्रिक नीति परिणामों का इंतजार करें.
फिलहाल भारतीय बाजार ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में हैं. यदि मध्य पूर्व में तनाव कम नहीं होता है, तो आने वाले दिनों में और अधिक बिकवाली देखने को मिल सकती है. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने पोर्टफोलियो में उच्च गुणवत्ता वाले शेयरों पर ध्यान केंद्रित करें और बाजार की अत्यधिक अस्थिरता से बचें.


