Saturday, March 14, 2026

भारतीय शेयर बाजार इस सप्ताह 0.4% की मामूली बढ़त के साथ बंद होने में सफल रहा.

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मुंबई: भारतीय शेयर बाजार के लिए यह सप्ताह उतार-चढ़ाव भरा रहा, लेकिन शुक्रवार को बाजार ने रिकवरी करते हुए मामूली बढ़त के साथ सप्ताह का अंत किया. निफ्टी और सेंसेक्स दोनों ही बेंचमार्क इंडेक्स करीब 0.4% की साप्ताहिक बढ़त दर्ज करने में सफल रहे. यह बढ़त तब आई है जब IT सेक्टर को ‘एजेंटिक एआई’ और भविष्य के आउटसोर्सिंग मॉडल को लेकर पैदा हुई चिंताओं के कारण भारी बिकवाली का सामना करना पड़ा.

बाजार का साप्ताहिक प्रदर्शन
शुक्रवार को सेंसेक्स 316 अंक या 0.38% चढ़कर 82,814 पर बंद हुआ. वहीं, निफ्टी 50 ने 0.39% की साप्ताहिक बढ़त के साथ 25,571 के स्तर पर कारोबार समाप्त किया. हालांकि, सेक्टोरल स्तर पर प्रदर्शन मिला-जुला रहा. इस सप्ताह निफ्टी मीडिया (-2.46%) और कैपिटल मार्केट्स (-2.44%) सबसे अधिक गिरावट वाले सेक्टर रहे, जबकि IT इंडेक्स 2.07% टूट गया.

प्रमुख वैश्विक और घरेलू कारक
बाजार की इस रिकवरी के पीछे सबसे बड़ा कारण अमेरिका से आई सकारात्मक खबर रही. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ (शुल्कों) को रद्द करने के फैसले ने वैश्विक बाजारों में जोश भर दिया. इसका असर गिफ्ट निफ्टी (GIFT Nifty) पर भी दिखा, जो 1% से अधिक की तेजी के साथ सोमवार के लिए मजबूत शुरुआत के संकेत दे रहा है.

घरेलू मोर्चे पर, भारत के मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI के आंकड़े फरवरी में 59.3 पर पहुंच गए, जो तीन महीनों का उच्चतम स्तर है. यह भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत मांग और उत्पादन वृद्धि को दर्शाता है. इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच हुए ‘पैक्स सिलिका’ (Pax Silica) समझौते ने भी व्यापारिक मोर्चे पर निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है.

चुनौतियां और आगामी संकेत
बाजार के लिए सबसे बड़ी चिंता भू-राजनीतिक तनाव है. अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें 6.6% बढ़कर 71.8 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई हैं. कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयात निर्भर देश के लिए जोखिम पैदा कर सकती हैं.

अगले सप्ताह के लिए नजरिया
विश्लेषकों का मानना है कि निफ्टी के लिए 25,350 पर तत्काल सपोर्ट है, जबकि 25,650 पर कड़ा प्रतिरोध देखा जा सकता है. अगले सप्ताह बाजार की दिशा मुख्य रूप से भारत के तीसरी तिमाही (Q3) के जीडीपी आंकड़ों, वैश्विक तेल कीमतों और भारत-अमेरिका व्यापारिक घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी.

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