वैश्विक स्तर पर बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और अनिश्चितता का असर आज भारतीय शेयर बाजार पर साफ देखने को मिला. सोमवार सुबह जब बाजार खुला, तो घरेलू सूचकांक लाल निशान में कारोबार करते नजर आए. पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने निवेशकों की धारणा को प्रभावित किया है.
बाजार का ताजा हाल (सुबह 9:16 बजे)
सप्ताह के पहले कारोबारी दिन बीएसई (BSE) का बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स 112.95 अंक (0.15%) गिरकर 73,206.60 के स्तर पर खुला. वहीं, एनएसई (NSE) का निफ्टी-50 भी 16.35 अंक (0.07%) की गिरावट के साथ 22,696.75 पर कारोबार करता दिखा. शुरुआती कारोबार में निफ्टी 22,700 के मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे फिसल गया, जो बाजार में कमजोरी के संकेत दे रहा है.
मिडकैप और स्मॉलकैप में ज्यादा दबाव
लार्जकैप के मुकाबले छोटे और मध्यम शेयरों में ज्यादा बिकवाली देखी जा रही है. निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स लगभग 0.5% की गिरावट के साथ खुले हैं.
इन शेयरों में रही हलचल
- तेजी वाले शेयर: बाजार की सुस्ती के बावजूद विप्रो (Wipro), हिंडाल्को (Hindalco), टाइटन (Titan) और ट्रेंट (Trent) जैसे शेयरों ने बढ़त के साथ शुरुआत की. आईटी सेक्टर में डिफेंसिव बाइंग देखने को मिल रही है.
- गिरावट वाले शेयर: बिकवाली के दबाव में कोटक महिंद्रा बैंक (Kotak Mahindra Bank), इंटरग्लोब एविएशन (IndiGo), टाटा स्टील (Tata Steel) और बजाज फाइनेंस (Bajaj Finance) प्रमुख रूप से पिछड़ गए.
विशेषज्ञों की राय: ‘छुरी की धार’ पर बाजार
बैंकिंग और मार्केट एक्सपर्ट अजय बग्गा के अनुसार, बाजार इस समय ‘छुरी की धार’ पर है. इसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) खोलने के लिए दिया गया अल्टीमेटम 24 घंटे के लिए बढ़ा दिया है. अब मंगलवार शाम (अमेरिकी समय) तक की नई समयसीमा तय की गई है. ट्रंप ने चेतावनी दी है कि यदि समझौता नहीं हुआ, तो ईरान के पावर प्लांट और पुलों जैसे नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमला किया जा सकता है.
तकनीकी स्तर और विदेशी निवेश (FII)
कोटक सिक्योरिटीज के श्रीकांत चौहान का मानना है कि निफ्टी के लिए 22,400 से 22,500 का स्तर बेहद महत्वपूर्ण है. यदि बाजार इस सपोर्ट लेवल को तोड़ता है, तो भारी गिरावट आ सकती है. वहीं, बैंक निफ्टी के लिए 50,500 का स्तर निर्णायक होगा.
विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी शॉर्ट पोजीशन (लगभग 83%) बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई है. निवेशकों को सलाह दी जा रही है कि वे भू-राजनीतिक घटनाक्रमों पर नजर रखें, क्योंकि ईरान-अमेरिका संकट में किसी भी सकारात्मक खबर से बाजार में तेज रिकवरी (Short Covering) भी देखने को मिल सकती है.


