Monday, March 30, 2026

भारत सरकार ने इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन बढ़ाने के लिए ₹7,104 करोड़ के 29 नए प्रोजेक्ट्स को मंजूरी देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में कदम बढ़ाया है.

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नई दिल्ली: भारत को दुनिया का ‘इलेक्ट्रॉनिक्स पावरहाउस’ बनाने के सपने को आज एक बड़ी मजबूती मिली है. केंद्र सरकार ने ‘इलेक्ट्रॉनिक्स घटक विनिर्माण योजना’ (ECMS) के तहत 29 नए आवेदनों को हरी झंडी दे दी है. इस फैसले से देश में ₹7,104 करोड़ का नया निवेश आएगा और लगभग 14,246 लोगों को सीधे रोजगार मिलने की उम्मीद है.

केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने इन प्रोजेक्ट्स को भारत की तकनीकी यात्रा का एक “ऐतिहासिक पड़ाव” बताया है. उन्होंने कहा कि यह केवल असेंबलिंग (पुर्जे जोड़ना) तक सीमित नहीं है, बल्कि अब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के ‘कोर कॉम्पोनेंट्स’ (मुख्य पुर्जे) बनाने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है.

वैल्यू चेन में भारत की बढ़ती धमक
अब तक भारत विदेशों से पुर्जे मंगाकर उन्हें जोड़कर फाइनल प्रोडक्ट तैयार करता था. लेकिन इस नई मंजूरी के बाद भारत अब एंटीना सिस्टम, कैपेसिटर, लीथियम-आयन सेल और रेयर अर्थ मैग्नेट जैसे महत्वपूर्ण पुर्जों का निर्माण खुद करेगा.

मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, “हमने धीरे-धीरे मैन्युफैक्चरिंग के हर स्तर पर प्रगति की है. अब हम सेमीकंडक्टर विकास के साथ-साथ सबसे जटिल पुर्जों को बनाने के चरण में पहुंच गए हैं.” अब तक इस योजना (ECMS) के तहत कुल 75 प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी जा चुकी है, जिनमें ₹61,671 करोड़ से अधिक का निवेश शामिल है. इनसे कुल 65,000 डायरेक्ट नौकरियां पैदा होंगी.

स्वदेशी तकनीक और ‘रेयर अर्थ मैग्नेट’ का जादू
इस बार की सबसे बड़ी उपलब्धि भारत के पहले ‘रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट’ प्लांट को मिली मंजूरी है. यह प्लांट पूरी तरह से भारतीय इंजीनियरों द्वारा विकसित स्वदेशी तकनीक पर आधारित होगा. ये मैग्नेट आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स और डिफेंस उपकरणों के लिए बेहद जरूरी हैं. इस कदम से भारत की विदेशी देशों (विशेषकर चीन) पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की स्थिति मजबूत होगी.

साथ ही, देश में पहली बार ‘सरफेस माउंट डिवाइस (SMD) पैसिव कैपेसिटर’ बनाने का रास्ता भी साफ हो गया है. यह छोटा सा पुर्जा सर्किट बोर्ड (PCB) बनाने के लिए अनिवार्य होता है, जिसे अब तक बड़े पैमाने पर आयात करना पड़ता था.

आयात पर निर्भरता में आएगी भारी कमी
सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत न केवल आत्मनिर्भर बने, बल्कि एक बड़ा निर्यातक भी बने. आंकड़ों के अनुसार, इन नए प्रोजेक्ट्स के शुरू होने से:

  • लीथियम-आयन सेल: घरेलू मांग का 61% हिस्सा भारत में ही बनेगा.
  • प्रिंटेड सर्किट बोर्ड (PCB): देश की 50% जरूरत स्थानीय स्तर पर पूरी होगी.
  • कैपेसिटर और कनेक्टर्स: क्रमशः 16% और 33% मांग घरेलू उत्पादन से पूरी होगी.

लमिनेट्स और रिले जैसे पुर्जों के मामले में भारत जल्द ही पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा और आयात से ज्यादा निर्यात करने की स्थिति में होगा.

राज्यों में निवेश का वितरण
यह औद्योगिक विकास केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि 8 अलग-अलग राज्यों में फैला हुआ है.

  • कर्नाटक और महाराष्ट्र: दोनों राज्यों में 7-7 प्रोजेक्ट्स मंजूर किए गए हैं.
  • अन्य राज्य: तमिलनाडु, केरल, हरियाणा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात में भी बड़ी परियोजनाओं को मंजूरी मिली है.

MSME और स्वदेशी डिजाइन पर जोर
इस योजना की एक खास बात यह है कि इसमें सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की बड़ी भागीदारी है. सरकार का मानना है कि मैन्युफैक्चरिंग के साथ-साथ ‘डिजाइन’ पर भी ध्यान देना होगा. मंत्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि “असली मुनाफा डिजाइन और बौद्धिक संपदा (IP) में है. सिर्फ फैक्ट्री लगाने से ज्यादा जरूरी है कि प्रोडक्ट का डिजाइन भारतीय हो.”

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव एस. कृष्णन ने कहा कि उद्योग जगत ने इस योजना में जबरदस्त दिलचस्पी दिखाई है. उन्होंने कंपनियों से इन प्रोजेक्ट्स को तेजी से पूरा करने की अपील की है. सरकार ने अगले 18 महीनों के लिए कैपिटल इक्विपमेंट और सप्लाई चेन के लिए भी दरवाजे खुले रखे हैं.

भारत अब 2030-31 तक 500 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग के लक्ष्य की ओर मजबूती से बढ़ रहा है. वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव के बावजूद, भारत की यह तैयारी उसे दुनिया के भरोसेमंद सप्लाई चेन पार्टनर के रूप में स्थापित कर रही है.

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