धनबादः देश की ऊर्जा आपूर्ति की रीढ़ माने जाने वाले कोयला क्षेत्र को और अधिक सुदृढ़ बनाने की दिशा में आज गुरुवार को एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली.
भारत कोकिंग कोल लिमिटेड के अध्यक्ष-सह-प्रबंध निदेशक (सीएमडी) मनोज कुमार अग्रवाल ने दक्षिण पूर्व रेलवे के महाप्रबंधक अनिल कुमार जैन के साथ एसईआर मुख्यालय, कोलकाता में उच्चस्तरीय बैठक की. इस बैठक में कोयला परिवहन, रेक लोडिंग और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास से जुड़े कई अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई.

इस बैठक की शुरुआत आद्रा मंडल के अंतर्गत रेक लोडिंग प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा के साथ हुई. अधिकारियों ने पिछले वित्तीय वर्ष में सामने आई परिचालन चुनौतियों का आकलन किया और उन बाधाओं को दूर करने के लिए ठोस रणनीति तैयार करने पर जोर दिया. खासतौर पर रेक की समयबद्ध उपलब्धता, लोडिंग-अनलोडिंग की प्रक्रिया और लॉजिस्टिक समन्वय को बेहतर बनाने के उपायों पर गंभीर चर्चा की गई.
सीएमडी मनोज अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि ऊर्जा क्षेत्र की मांग को पूरा करने के लिए कोयला आपूर्ति में किसी भी प्रकार की बाधा स्वीकार्य नहीं है. उन्होंने रेलवे के साथ बेहतर तालमेल के जरिए रेक मूवमेंट को और तेज व सुचारु बनाने पर बल दिया. वहीं रेलवे अधिकारियों ने भी भरोसा दिलाया कि परिचालन स्तर पर सभी आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे.

इस बैठक में साइडिंग की कार्यक्षमता बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया. यह माना गया कि यदि साइडिंग संचालन को अधिक कुशल बनाया जाए तो रेक टर्नअराउंड टाइम में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है. इसके अलावा वॉशरी, व्हार्फ और कनेक्टिविटी प्रोजेक्ट्स जैसे बुनियादी ढांचे के विकास कार्यों को तेज करने पर भी सहमति बनी, ताकि भविष्य में कोयला ढुलाई और अधिक सुगम हो सके.
एक अन्य महत्वपूर्ण पहलू भूमि और इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े मुद्दों पर समन्वय का रहा. दोनों पक्षों ने माना कि कई परियोजनाएं केवल जमीन और अनुमतियों से संबंधित अड़चनों के कारण धीमी पड़ जाती हैं. ऐसे में बेहतर समन्वय के जरिए इन बाधाओं को जल्द दूर करने की जरूरत है. जिससे कोयला निकासी (इवैक्यूएशन) की प्रक्रिया निर्बाध रूप से जारी रह सके.
वित्तीय वर्ष 2026–27 को ध्यान में रखते हुए अधिकारियों ने दीर्घकालिक रणनीति पर भी चर्चा की. लक्ष्य रखा गया कि तकनीकी सुधार, बेहतर योजना और मजबूत समन्वय के जरिए कोयला परिवहन व्यवस्था को और अधिक आधुनिक व प्रभावी बनाया जाए.
इस उच्चस्तरीय बैठक में बीसीसीएल और दक्षिण पूर्व रेलवे मुख्यालय के साथ-साथ आद्रा मंडल के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे. बैठक को कोयला परिवहन व्यवस्था में सुधार और ऊर्जा क्षेत्र की जरूरतों को समय पर पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.


