Thursday, October 1, 2026

भारत के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने पकड़ी रफ्तार, सितंबर में PMI 55.1 पर पहुंचा.

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नई दिल्ली: भारतीय मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में सितंबर के दौरान गतिविधियों में तेजी देखने को मिली। HSBC India के ताजा आंकड़ों के अनुसार, देश का मैन्युफैक्चरिंग PMI अगस्त के 52.8 से बढ़कर सितंबर में 55.1 हो गया। यह पिछले सात महीनों में इस सूचकांक का सबसे ऊंचा स्तर है।

PMI का 50 से ऊपर रहना आम तौर पर निजी क्षेत्र की गतिविधियों में विस्तार का संकेत माना जाता है। सितंबर के आंकड़ों से नए ऑर्डर, उत्पादन और रोजगार से जुड़े संकेतकों में भी सुधार दर्ज हुआ है।

नए ऑर्डर्स ने बढ़ाई फैक्ट्रियों की रफ्तार

सितंबर में कंपनियों को घरेलू बाजार के साथ-साथ विदेशी बाजारों से भी बेहतर मांग मिली। नए ऑर्डर्स में वृद्धि का असर सीधे उत्पादन पर पड़ा और फैक्ट्रियों की गतिविधियां तेज हुईं।

रिपोर्ट के मुताबिक इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य उत्पाद, फार्मास्यूटिकल्स और टेक्सटाइल जैसे क्षेत्रों में मांग मजबूत रही। अमेरिका, यूरोप, यूएई और ब्राजील जैसे विदेशी बाजारों से भी भारतीय उत्पादों के लिए ऑर्डर मिलने की जानकारी सामने आई है।

उत्पादन में भी सुधार

मांग में बढ़ोतरी के साथ कंपनियों ने उत्पादन की गति बढ़ाई। सितंबर में उत्पादन वृद्धि पिछले चार महीनों में सबसे तेज रही। कारोबार की बेहतर संभावनाओं को देखते हुए कंपनियों ने इनपुट की खरीद बढ़ाने के साथ अपने स्टॉक को भी मजबूत किया।

रोजगार के मोर्चे पर भी सकारात्मक संकेत

मैन्युफैक्चरिंग गतिविधियों में बढ़ोतरी का असर रोजगार पर भी दिखाई दिया। सितंबर में कंपनियों ने कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने की रफ्तार तेज की। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मई के बाद यह भर्ती की सबसे तेज गति रही।

यह संकेत बताता है कि बढ़ती मांग के बीच कंपनियां आने वाले महीनों में कारोबार को लेकर अपेक्षाकृत सकारात्मक रुख अपना रही हैं।

इनपुट लागत बढ़ना बना चुनौती

मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए सितंबर पूरी तरह चुनौती-मुक्त नहीं रहा। कंपनियों की लागत में बढ़ोतरी दर्ज हुई। स्टील, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स और फार्मास्युटिकल उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले कुछ रसायनों की कीमतों में वृद्धि से लागत का दबाव बढ़ा।

हालांकि, कंपनियों ने बढ़ी हुई लागत का पूरा असर ग्राहकों तक नहीं पहुंचाया है, जिससे बिक्री कीमतों पर दबाव सीमित रहने का संकेत मिला।

दूसरी तिमाही का औसत PMI 53.8

सितंबर में मजबूत सुधार के बावजूद जुलाई और अगस्त की अपेक्षाकृत धीमी गतिविधियों का असर दूसरी तिमाही के औसत पर रहा। इस अवधि में मैन्युफैक्चरिंग PMI का औसत 53.8 रहा।

HSBC की चीफ इंडिया इकोनॉमिस्ट प्रांजुल भंडारी के मुताबिक, तिमाही के अंत में फैक्ट्री गतिविधियों में मजबूती देखने को मिली और घरेलू व अंतरराष्ट्रीय मांग में सुधार से बिक्री तथा उत्पादन को सहारा मिला।

सितंबर के PMI आंकड़े भारतीय मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र में गतिविधियों के दोबारा मजबूत होने का संकेत दे रहे हैं।

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