नई दिल्ली: देश के विदेशी मुद्रा भंडार में हाल ही में बड़ी गिरावट देखने को मिली है. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, 21 नवंबर को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 4.472 अरब डॉलर घटकर 688.104 अरब डॉलर पर आ गया. यह गिरावट मुख्य रूप से स्वर्ण भंडार के मूल्य में कमी के कारण हुई है. 14 नवंबर 2025 को विदेशी मुद्रा भंडार 5.543 अरब डॉलर बढ़कर 692.576 अरब डॉलर पर पहुंचा था, जिससे यह साफ होता है कि बीते कुछ हफ्तों में विदेशी मुद्रा भंडार में उतार-चढ़ाव का क्रम लगातार जारी है.
विशेष रूप से ध्यान देने योग्य है कि फॉरेक्स रिजर्व में यह गिरावट पिछले पांच हफ्तों में चौथी बार दर्ज की गई है. 17 अक्टूबर को समाप्त हफ्ते में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 702.28 अरब डॉलर था. तब से अब तक कुल 14.18 अरब डॉलर की गिरावट आ चुकी है.
RBI की रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि स्पेशल ड्रॉइंग राइट (SDR) में मामूली कमी आई है. 14 नवंबर को SDR 18.65 अरब डॉलर था, जो 21 नवंबर को घटकर 18.56 अरब डॉलर पर आ गया. वहीं IMF में भारत की रिजर्व पोजिशन भी लगभग स्थिर रही और यह 4.78 अरब डॉलर से हल्की गिरावट के साथ 4.75 अरब डॉलर पर दर्ज हुई. SDR और IMF रिजर्व पोजिशन में उतार-चढ़ाव सामान्य माने जाते हैं और इनका कुल रिजर्व पर असर सीमित रहता है.
विदेशी मुद्रा भंडार का सबसे बड़ा हिस्सा फॉरेन करेंसी एसेट्स (FCA) है. FCA 14 नवंबर को 562.29 अरब डॉलर था, जबकि 21 नवंबर तक यह घटकर 560.60 अरब डॉलर रह गया. यह संकेत देता है कि डॉलर की मजबूती और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों के बीच RBI को मार्केट में हस्तक्षेप करना पड़ा. रुपये की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव और वैश्विक यील्ड में वृद्धि FCA के मूल्य को प्रभावित कर रही है.
गौरतलब है कि फॉरेक्स रिजर्व के अलावा देश के स्वर्ण भंडार में भी गिरावट देखने को मिली है. हालांकि, इस वित्त वर्ष में RBI ने गोल्ड रिजर्व पर विशेष ध्यान दिया है और कई हफ्तों तक सोने की खरीदारी भी की गई. मौजूदा आर्थिक हालात और वैश्विक बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए, RBI की इस रणनीति से देश की विदेशी मुद्रा स्थिति पर नियंत्रित असर पड़ने की उम्मीद है.
इस गिरावट के बावजूद, विशेषज्ञों का मानना है कि भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में स्थिरता बनी हुई है और RBI सतर्कता के साथ बाजार में हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित कर रहा है.


