Wednesday, February 4, 2026

भारत-अमेरिका समझौते से भारतीय निर्यात को मजबूती मिली है, जबकि पड़ोसी देशों पर उच्च टैरिफ के कारण भारतीय सामान वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा.

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नई दिल्ली: अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर टैरिफ में की गई बड़ी कटौती को भारतीय निर्यातकों के लिए अहम राहत माना जा रहा है. भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत अब अमेरिका ने भारतीय सामान पर लगाया जाने वाला टैक्स 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. इससे टेक्सटाइल, गारमेंट्स, सी-फूड, केमिकल्स, इंजीनियरिंग गुड्स और रत्न एवं आभूषण जैसे प्रमुख सेक्टर्स को सीधा फायदा मिलने की संभावना है.

किन सेक्टर्स को मिलेगा सबसे ज्यादा लाभ
विशेषज्ञों के अनुसार, टैरिफ घटने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे. खासकर श्रम-प्रधान उद्योगों में ऑर्डर बढ़ने और उत्पादन क्षमता के विस्तार की उम्मीद है. इससे रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं.

सबसे कम टैरिफ किन देशों पर
अमेरिका ने यूनाइटेड किंगडम (यूके) पर सबसे कम टैरिफ लगाया है. इसके अलावा कई देशों को भारत से भी कम टैरिफ का लाभ मिल रहा है.

देशटैरिफ (%)
यूनाइटेड किंगडम10
यूरोपीय संघ15
जापान15
दक्षिण कोरिया15
स्विट्ज़रलैंड15
न्यूज़ीलैंड15
नॉर्वे15
तुर्की15
नाइजीरिया15
पाकिस्तान19
बांग्लादेश20

भारत से अधिक टैरिफ झेलने वाले देश
कई ऐसे देश भी हैं जिन पर भारत की तुलना में कहीं ज्यादा अमेरिकी टैरिफ लगाया गया है.

देशटैरिफ (%)
ब्राजील50
सीरिया41
म्यांमार40
लाओस40
चीन35
कनाडा35
इराक35
दक्षिण अफ्रीका30
लीबिया30
मेक्सिको25

एशियाई देशों के मुकाबले भारत की स्थिति
एशियाई बाजार की बात करें तो भारत को अब चीन, बांग्लादेश और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के मुकाबले लागत का फायदा मिल सकता है. जहां भारत पर 18 प्रतिशत टैरिफ लागू है, वहीं बांग्लादेश, श्रीलंका और वियतनाम पर 20 प्रतिशत तथा पाकिस्तान और थाईलैंड पर 19 प्रतिशत टैरिफ है.

निवेश और बाजार हिस्सेदारी पर असर
जानकारों का कहना है कि कम टैरिफ से भारतीय कंपनियों को अमेरिकी बाजार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का मौका मिलेगा. साथ ही मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में नए निवेश आने की संभावनाएं भी मजबूत होंगी. कुल मिलाकर, अमेरिकी टैरिफ में कटौती को भारत के निर्यात और औद्योगिक विकास के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है.

टैरिफ लगाने का क्या मतलब
टैरिफ का अर्थ है विदेशी सामान पर लगने वाला सीमा शुल्क. जब कोई देश इसे बढ़ाता है, तो आयातित वस्तुएं महंगी हो जाती हैं. इसका मुख्य उद्देश्य स्थानीय उद्योगों को विदेशी प्रतिस्पर्धा से बचाना है, लेकिन इससे उपभोक्ताओं के लिए महंगाई बढ़ सकती है और देशों के बीच व्यापारिक तनाव पैदा हो सकता है.

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