Tuesday, August 18, 2026

भारत-अमेरिका व्यापार को 2030 तक 500 अरब डॉलर तक पहुंचाने पर जोर, स्थिर टैक्स नीति की जरूरत: सर्जियो गोर.

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मुंबई: भारत और अमेरिका के बीच आर्थिक रिश्तों को और मजबूत करने के लिए दोनों देशों को व्यापार और निवेश से जुड़ी बाधाओं को कम करने पर ध्यान देना होगा। मुंबई में आयोजित इंडो-अमेरिकन चैंबर ऑफ कॉमर्स (IACC) के राष्ट्रीय सम्मेलन में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने स्थिर और पारदर्शी टैक्स व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया।

सम्मेलन का विषय ‘भारत-अमेरिका व्यापक रणनीतिक साझेदारी को फिर से परिभाषित करना’ था। अपने संबोधन में गोर ने दोनों देशों के बीच बढ़ते कारोबारी और रणनीतिक सहयोग का उल्लेख करते हुए कहा कि भविष्य की आर्थिक साझेदारी को मजबूत बनाने के लिए दोनों पक्षों को साझेदार के रूप में मिलकर काम करना होगा।

टैक्स और नियमों को लेकर स्पष्टता पर जोर

अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, कारोबार के लिए स्थिर और पूर्वानुमान योग्य नीतियां बेहद जरूरी हैं। उन्होंने भारत और अमेरिका से टैक्स तथा नियामकीय प्रक्रियाओं से जुड़ी अड़चनों को दूर करने की दिशा में काम करने की अपील की।

उनका कहना था कि पारदर्शी व्यवस्था से दोनों देशों की कंपनियों के लिए निवेश और व्यापार का माहौल बेहतर बनाया जा सकता है।

भारत में अमेरिकी निवेश का भी किया जिक्र

सर्जियो गोर ने भारत में अमेरिकी दूतावास से जुड़े निवेश प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि यहां अमेरिकी निवेश में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने भारतीय कंपनियों की ओर से अमेरिका में किए जा रहे निवेश को भी दोनों देशों के लिए लाभकारी बताया।

उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों (IPR) की सुरक्षा को भी महत्वपूर्ण मुद्दा बताया। उनके अनुसार, निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए कंपनियों की बौद्धिक संपदा और कारोबारी हितों की सुरक्षा जरूरी है।

2030 तक 500 अरब डॉलर के व्यापार का लक्ष्य

गोर ने भारत-अमेरिका व्यापार में पिछले वर्षों के दौरान हुई वृद्धि को भी रेखांकित किया। उनके मुताबिक, दो दशक पहले दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 20 अरब डॉलर था, जो बढ़कर लगभग 240 अरब डॉलर के स्तर तक पहुंच गया है।

उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों देश सहयोग के जरिए 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 500 अरब डॉलर तक ले जाने के लक्ष्य को हासिल कर सकते हैं।

वैश्विक सप्लाई चेन और तकनीक में सहयोग

अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत सहयोग का असर सिर्फ द्विपक्षीय व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। दोनों देशों की साझेदारी से वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूती देने और महत्वपूर्ण तकनीकी क्षेत्रों में नए नवाचार को बढ़ावा देने में मदद मिल सकती है।

उन्होंने भारत-अमेरिका संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए कारोबार, निवेश, तकनीक और नीतिगत सहयोग को और मजबूत करने की आवश्यकता बताई।

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