नई दिल्ली: भारत और अमेरिका ने मंगलवार को सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर पैनल और हाई-टेक रक्षा उपकरणों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले महत्वपूर्ण खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) और दुर्लभ भू-तत्वों (रैयर अर्थ्स) की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने के लिए एक ऐतिहासिक रणनीतिक समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं. यह समझौता नई दिल्ली में आयोजित क्वाड (Quad) विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान किया गया. इस पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर और अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने हस्ताक्षर किए.
चीन के दबदबे को चुनौती
यह समझौता ऐसे समय में हुआ है जब दुनिया भर में इन महत्वपूर्ण कच्चे मालों पर चीन के बढ़ते नियंत्रण को लेकर चिंताएं गहरी हो रही हैं. वर्तमान में चीन के पास इन खनिजों के खनन और प्रसंस्करण का सबसे बड़ा हिस्सा है, जिससे वह वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करने की क्षमता रखता है. इस समझौते का मुख्य उद्देश्य एक वैकल्पिक और सुरक्षित वैश्विक सप्लाई चेन तैयार करना है, ताकि किसी एक देश के एकाधिकार पर निर्भरता को कम किया जा सके.
खनिज खनन से लेकर रीसाइक्लिंग तक सहयोग
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने समझौते के बाद कहा, “हम महत्वपूर्ण खनिजों और दुर्लभ भू-तत्वों के खनन और प्रसंस्करण की आपूर्ति को सुरक्षित करने के लिए भारत-अमेरिका द्विपक्षीय ढांचे पर हस्ताक्षर कर रहे हैं. यह कदम समय की मांग और बेहद महत्वपूर्ण है.” उन्होंने स्पष्ट किया कि यह रूपरेखा खनन, प्रसंस्करण, रीसाइक्लिंग और संबंधित निवेश सहित पूरी सप्लाई चेन में सहयोग को गहरा करेगी.
अमेरिका का बयान: संप्रभुता की सुरक्षा
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस समझौते को दोनों देशों के राष्ट्रीय हितों के लिए एक ठोस उदाहरण बताया. उन्होंने कहा, “भारत और अमेरिका जैसी जीवंत नवाचार अर्थव्यवस्थाएं इन बुनियादी सामग्रियों को किसी एक देश के एकाधिकार के भरोसे नहीं छोड़ सकतीं. कोई भी देश संकट के समय या सामान्य दिनों में हमारे संप्रभु राष्ट्रीय हितों के खिलाफ इसका इस्तेमाल दबाव बनाने के लिए कर सकता है.”
पैक्स सिलिका और भविष्य की राह
रुबियो ने यह भी उल्लेख किया कि इस समझौते की नींव इस साल 4 फरवरी को वाशिंगटन में आयोजित क्रिटिकल मिनरल्स फोरम के दौरान रखी गई थी. इसके साथ ही, भारत ने हाल ही में अमेरिकी नेतृत्व वाले ‘पैक्स सिलिका डिक्लेरेशन’ (Pax Silica Declaration) पर भी हस्ताक्षर किए हैं, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), सेमीकंडक्टर और क्रिटिकल मिनरल्स के लिए एक सुरक्षित और भरोसेमंद ढांचा तैयार करने की वैश्विक मुहिम है.


