रांचीः भाजपा नेता अनिल टाइगर की हत्या की साजिश रचने वाले देवव्रत नाथ शाहदेव और हत्या के लिए शूटर उपलब्ध करवाने वाले अभिषेक सिन्हा उर्फ सूरज सिन्हा की तलाश में रांची पुलिस ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है. पुलिस का दावा है कि बाकी अपराधियों की तरह दोनों जल्द पुलिस की गिरफ्त में होंगे.
अनिल टाइगर हत्याकांड में फरार चल रहा है देवव्रत नाथ शाहदेव और अभिषेक सिन्हा की गिरफ्तारी के लिए रांची पुलिस की स्पेशल टीम दोनों के सभी संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है.
डीआईजी सह रांची एसएसपी चन्दन कुमार सिन्हा ने बताया कि अनिल हत्याकांड में फरार चल रहे दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार काम चल रहा है. पुलिस की टीम जल्द ही दोनों को गिरफ्तार कर लेगी. फिलहाल पुलिस की कार्रवाई की सभी बातें शेयर नहीं की जा सकती हैं, लेकिन इतना जरूर कहा जा सकता है कि दोनों को जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा.
देवव्रत है मुख्य साजिशकर्ता
पालकोट राजघराने से सम्बन्ध रखने वाला देवव्रत नाथ शाहदेव ही अनिल टाइगर की हत्याकांड का मुख्य साजिश करता था. यह पुलिस की जांच में स्पष्ट हो चुका है. लेकिन जैसे ही देवव्रत को यह भनक लगी कि अब वह फंस चुका है, वैसे ही वह फरार हो गया. अनिल हत्याकांड में अब तक गिरफ्तार हो चुके दोनों शूटर्स और अन्य तीन अपराधियों के बयान ने यह साबित कर दिया कि हत्या की साजिश देवव्रत ने ही रची थी. अनिल की हत्या के लिए देवव्रत ने ही कोलकाता में अपराधी अभिषेक सिन्हा उर्फ सूरज सिन्हा को सुपारी दी थी.
कांके की जमीन बनी वजह
अनिल टाइगर और देवव्रत नाथ शाहदेव के बीच दुश्मनी की वजह कांके इलाके की 10 एकड़ जमीन बनी. कांके थाना क्षेत्र स्थित चामगुरु में 10 एकड़ जमीन को लेकर बिल्डर देवव्रत नाथ शाहदेव और अनिल टाइगर के बीच विवाद चल रहा था. विवादित जमीन पर देवव्रत कब्जा करना चाहता था, लेकिन ग्रामीण उसका विरोध कर रहे थे. जबकि अनिल टाइगर ग्रामीणों के साथ मिलकर विवादित जमीन पर हो रहे कब्जे के खिलाफ काम कर रहे थे.
देवव्रत नाथ शाहदेव का दावा था कि 10 एकड़ जमीन उसकी है, लेकिन अनिल उसपर उसका कब्जा नही होने दे रहे थे. मामले को सुलझाने के लिए कई बार देवब्रत नाथ शाहदेव एवं अनिल महतो के बीच वार्ता भी हुई, लेकिन हर वार्ता विफल रहा. इसी बीच साल 2023 के अगस्त माह में देवब्रत नाथ शाहदेव द्वारा विवादित भूमि पर चाहरदिवारी का निर्माण कर जबरन दखल कब्जा किया जा रहा था.
अनिल टाइगर ने उसी दौरान स्थानीय ग्रामीणों के सहयोग से देवब्रत नाथ शाहदेव के द्वारा किये जा रहे दखल-कब्जा का विरोध किया. मामले को लेकर उस समय देवव्रत ने विवादित भूमि के केयर टेकर दिलीप कुमार मुंडा के माध्यम से कांके थाना में अनिल महतो सहित 08 नामजद एवं 40-50 अन्य के विरूद्ध मारपीट, तोड़फोड़ करने एवं रंगदारी की मांग करने के आरोप में कांके थाना में एफआईआर भी दर्ज करवाई थी.
इस घटना के बाद भी कई बार बिल्डर के द्वारा अपने सहयोगियों के माध्यम से विवादित जमीन पर दखल कब्जा करने और उसकी बिक्री करने का प्रयास किया गया. लेकिन हर बार अनिल टाइगर के विरोध की वजह से बिल्डर जमीन पर कब्जा करने में सफल नहीं हो पाया. लगातार जमीन पर कब्जे की कोशिश पर विफल होने के बाद अभिषेक सिन्हा को सुपारी देकर देवव्रत नाथ शाहदेव ने अनिल टाइगर की हत्या करवा दी.
बैठक में अनिल को पिस्टल दिखा धमकाया, अनिल ने मांगे थे 50 हजार रुपये पर डिसमिल
इस बीच दिसंबर 2023 में देवव्रत नाथ शाहदेव के पक्ष में हरमू निवासी विनोद पासवान नामक व्यक्ति और अनिल टाइगर ने विवाद के समाधान के लिये विनोद पासवान के घर बैठक की. बैठक के दौरान अनिल टाइगर ने यह मांग रखी कि प्रति डिसमिल 50,000 रुपये की दर से 4.5 करोड़ रुपये आप हमको दिजिए तब स्थानीय जोतकार आपका विरोध नहीं करेंगे. लेकिन बैठक के दौरान ही देवब्रत नाथ शाहदेव और मृतक अनिल टाइगर के बीच रुपये लेन-देने के बिन्दु पर समझौता नहीं हो पाने के कारण कहासुनी हुई तथा देवब्रत नाथ शाहदेव ने अनिल महतो को धमकी देते हुए उनपर पिस्टल तान दिया, जिसके परिणामस्वरूप समझौता खटाई में पड़ गया.
कोई रास्ता न निकलता देख हत्या की साजिश रची गई
मृतक अनिल टाइगर के द्वारा देवव्रत नाथ शाहदेव के विवादित भूमि का अवैध कब्जा किये जाने के सभी प्रयास का लगातार विरोध किये जाने से देवव्रत नाथ शाहदेव काफी नाराज था तथा जमीन पर दखल-कब्जा नहीं होने और उसकी बिक्री नहीं हो पाने के कारण उसे आर्थिक नुकसान भी हुआ था.
बिल्डर को जब लगा कि जब तक अनिल टाइगर जिंदा रहेंगे तब तक वह जमीन पर कब्जा नहीं कर पाएगा. इसके बाद ही उसने अनिल टाइगर की हत्या की साजिश रच डाली.
जमीन के चलते उजड़ गए दो परिवार
जिस जमीन को लेकर अनिल टाइगर और देवव्रत नाथ शाहदेव आमने-सामने हो गए थे वह जमीन पूरी तरह से विवादित है. लेकिन इस जमीन में कई परिवारों को उजाड़ दिया. अनिल टाइगर की हत्या की वजह से उनका पूरा परिवार सदमे में है. वहीं दूसरी तरफ देवव्रत नाथ शाहदेव पुलिस की गिरफ्त से भागा- भागा फिर रहा है. एक न एक दिन वह कानून के शिकंजे में होगा और उसकी जगह जेल में होगी. लेकिन जमीन को लेकर हुई खूनी जंग में अनिल टाइगर को अपनी जान गंवानी पड़ी.
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