Friday, February 13, 2026

बिहार विधानसभा में बताया गया कि सीमांचल के 5 जिलों में जनवरी 2020 से दिसंबर 2026 तक 9648 कैंसर मरीजों को मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से 65.40 करोड़ रुपये की मदद मिली।

Share

बिहार विधानसभा में बताया गया कि सीमांचल के पांच जिलों में जनवरी 2020 से दिसंबर 2026 तक 9648 कैंसर मरीजों को मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से 65.40 करोड़ रुपये की मदद मिली। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने यह जानकारी दी। सरकार ने कैंसर जांच, डे-केयर सेंटर और कीमोथेरेपी जैसी सुविधाएं भी बढ़ाई हैं। भूजल में आर्सेनिक-यूरेनियम पर शोध के लिए कोर ग्रुप भी गठित किया गया है।

पटना। बिहार विधानसभा में शुक्रवार को सीमांचल क्षेत्र में बढ़ते कैंसर मामलों को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी गई। स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने बताया कि जनवरी 2020 से दिसंबर 2026 के बीच सीमांचल के पांच जिलों में कैंसर पीड़ितों को 65 करोड़ 40 लाख 24 हजार रुपये की सहायता दी गई है। यह राशि मुख्यमंत्री चिकित्सा सहायता कोष से प्रदान की गई। इस अवधि में कुल 9648 कैंसर मरीजों को आर्थिक मदद मिली। यह जानकारी विधायक अख्तरउल इमान द्वारा लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के जवाब में दी गई। सदन में इस मुद्दे पर गंभीर चर्चा हुई।

जिलावार मरीजों और सहायता राशि का ब्योरा

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि अररिया जिले में 2049 मरीजों को 13.85 करोड़ रुपये दिए गए। कटिहार में 1945 मरीजों को 13.70 करोड़ रुपये की सहायता मिली। किशनगंज में 938 मरीजों को 6.70 करोड़ रुपये दिए गए


पूर्णिया में 2407 मरीजों के बीच 16.27 करोड़ रुपये वितरित किए गए। सुपौल जिले में 2309 मरीजों को सहायता दी गई। सरकार ने इसे स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़ी पहल बताया।

आयुष्मान और मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से भी लाभ

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री चिकित्सा कोष के अलावा अन्य योजनाओं से भी मरीजों को सहायता मिली है। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत इलाज किया गया।


साथ ही मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना से भी कैंसर मरीजों को लाभ दिया गया। वर्ष 2020 से दिसंबर 2026 तक सीमांचल के पांच जिलों में 22,217 कैंसर मरीजों पर 58.10 करोड़ रुपये खर्च किए गए।


सरकार का दावा है कि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को प्राथमिकता दी गई। इलाज में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जा रही है।

आर्सेनिक-यूरेनियम पर शोध के लिए कोर ग्रुप का गठन

स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि कैंसर के बढ़ते मामलों को देखते हुए शोध कार्य को बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्राउंड वाटर में आर्सेनिक और यूरेनियम की मात्रा को लेकर विशेष अध्ययन किया जाएगा।


इसके लिए पटना स्थित IGIMS के स्टेट कैंसर इंस्टीच्यूट के साथ समन्वय किया गया है। AIIMS Patna, HBCCH एंड आरसी मुजफ्फरपुर तथा महावीर कैंसर हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीच्यूट को भी जोड़ा गया है।


इन संस्थानों के विशेषज्ञों के साथ एक कोर ग्रुप का गठन किया गया है। यह ग्रुप शोध और रोकथाम की दिशा में काम करेगा।

सीमांचल में कैंसर जांच और इलाज की सुविधाएं

सरकार ने सीमांचल के सभी जिलों में कैंसर स्क्रीनिंग की सुविधा उपलब्ध कराई है। डे-केयर कैंसर सेंटर की स्थापना की गई है। पालिएटिव केयर, बायोप्सी और कीमोथेरेपी की सुविधाएं भी दी जा रही हैं।


महिलाओं में कैंसर जांच के लिए काल्पोस्कोपी मशीन लगाई गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि सुविधाओं का विस्तार लगातार किया जा रहा है। इससे मरीजों को इलाज के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा।

अख्तरउल इमान ने जताई गंभीर चिंता

  • ध्यानाकर्षण प्रस्ताव लाने वाले अख्तरउल इमान ने सीमांचल में कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंता जताई।
  • उन्होंने कहा कि बीते कई वर्षों से क्षेत्र में कैंसर मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है।
  • ग्राउंड लेवल वाटर में आर्सेनिक और यूरेनियम की अधिक मात्रा इसका मुख्य कारण है।
  • विशेषकर मुंह, छाती और लीवर कैंसर के मरीज बढ़ रहे हैं।
  • उन्होंने सरकार से ठोस और दीर्घकालिक समाधान की मांग की।
  • सरकार ने इस दिशा में लगातार कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

Table of contents [hide]

Read more

Local News