बिहार विधानसभा ने चार महत्वपूर्ण विधेयक पारित किए, जिससे राज्य के बोर्ड और निगमों में समूह ‘ख’, ‘ग’ और ‘घ’ के पदों पर नियुक्तियां अब आयोगों के माध्यम से होंगी। यह कदम चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाएगा।
पटना। बिहार विधानसभा ने मंगलवार को चार महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कर दिया गया। सदन की मंजूरी मिलने के बाद अब राज्य के बोर्ड और निगमों में नियुक्ति प्रक्रिया में बड़ा बदलाव लागू होगा। पारित विधेयकों में बिहार तकनीकी सेवा आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार कर्मचारी चयन आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026, बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 तथा बिहार सिविल न्यायालय विधेयक, 2026 शामिल हैं।
नए प्रविधान से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी
विधेयकों पर सरकार का पक्ष रखते हुए संसदीय कार्य मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि संशोधन के बाद राज्य के बोर्ड और निगमों में समूह ‘ख’ और ‘ग’ के पदों पर नियुक्तियां अब बिहार तकनीकी सेवा आयोग के माध्यम से की जाएंगी, जबकि समूह ‘घ’ के पदों पर नियुक्ति बिहार कर्मचारी चयन आयोग द्वारा की जाएगी।
अब तक इन संस्थानों में संबंधित बोर्ड या निगम स्वयं नियुक्तियां करते थे। नए प्रविधान से चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष और एकरूप होगी।
व्यवस्था बोर्ड और निगमों में भी लागू
मंत्री ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार के अधीन सभी विभागों और क्षेत्रीय कार्यालयों में पहले से ही इन श्रेणियों के पदों पर नियुक्तियां आयोगों के जरिए हो रही हैं। अब यही व्यवस्था बोर्ड और निगमों में भी लागू कर दी गई है, जिससे मनमानी या अनियमितता की गुंजाइश कम होगी।
वहीं, ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के विधायक अख्तरुल ईमान ने चर्चा के दौरान मांग उठाई कि विधानमंडल सत्र के दौरान नगर निकायों की बैठकें नहीं बुलाई जानी चाहिए। इस पर मंत्री ने आश्वासन दिया कि इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे।
बिहार नगरपालिका (संशोधन) विधेयक, 2026 के तहत अब नगर निकायों की स्थायी समितियों के सदस्यों का चयन अध्यक्ष द्वारा मनोनयन से नहीं, बल्कि सदस्यों के बीच लोकतांत्रिक प्रक्रिया से किया जाएगा।
इसे स्थानीय स्वशासन को अधिक जवाबदेह और सहभागी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
इसके अलावा बिहार सिविल न्यायालय विधेयक, 2026 पारित होने के बाद पुरानी ‘बिहार, उड़ीसा, बंगाल और असम सिविल न्यायालय’ व्यवस्था की जगह अब ‘बिहार सिविल न्यायालय’ नाम प्रभावी होगा, जिससे न्यायिक ढांचे को राज्य की वर्तमान प्रशासनिक सीमाओं के अनुरूप परिभाषित किया जा सकेगा।


