28 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS
Bihar Dairy News: बिहार में पशुपालकों और दूध उत्पादकों को सहकारी व्यवस्था से जोड़ने के लिए सुधा नेटवर्क का विस्तार किया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक राज्य में 4,800 नई प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां गठित की गई हैं। इनमें से 2,150 समितियों ने काम करना भी शुरू कर दिया है। इन नई समितियों के माध्यम से प्रतिदिन करीब 91 हजार किलोग्राम अतिरिक्त दूध एकत्र किया जा रहा है।
इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण इलाकों में दूध की खरीद और बिक्री की व्यवस्था को मजबूत करना, पशुपालकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना और उनकी आमदनी बढ़ाने में मदद करना है।
बिहार में सुधा की 4,800 नई दुग्ध समितियां गठित
डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के अंतर्गत बिहार राज्य दुग्ध सहकारी संघ लिमिटेड यानी कॉम्फेड के माध्यम से गांवों में प्राथमिक दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियां बनाई जा रही हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक गठित 4,800 समितियों में से 2,150 समितियां सक्रिय हो चुकी हैं। इनके जरिए दूध का नियमित संग्रहण शुरू हो गया है। इससे उन पशुपालकों को सहकारी नेटवर्क से जुड़ने का अवसर मिल रहा है, जिन्हें अपने दूध की बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर व्यवस्था की जरूरत है।
रोज 91 हजार किलो अतिरिक्त दूध का संग्रह
नई समितियों के सक्रिय होने से दूध संग्रहण में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में दिए गए आंकड़ों के अनुसार, इन समितियों से प्रतिदिन लगभग 91 हजार किलोग्राम अतिरिक्त दूध एकत्र किया जा रहा है।
वहीं, बिहार में कुल दूध संग्रहण का औसत प्रतिदिन करीब 25 लाख लीटर बताया गया है। यह पिछले वर्ष की तुलना में लगभग तीन लाख लीटर प्रतिदिन अधिक है।
दूध संग्रहण बढ़ने से सहकारी नेटवर्क के जरिए ज्यादा उत्पादकों को अपना दूध बेचने का अवसर मिल सकता है। हालांकि, किसी किसान की वास्तविक आय में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह दूध की मात्रा, गुणवत्ता, खरीद दर और पशुपालन की लागत जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।
बिहार की सभी 8,053 पंचायतों में जीविका-सुधा केंद्र खोलने की योजना
रिपोर्ट के अनुसार, सात निश्चय-3 के तहत कॉम्फेड राज्य की सभी 8,053 पंचायतों में जीविका-सुधा बिक्री केंद्र खोलने की योजना पर काम कर रहा है।
इस पहल के जरिए ग्रामीण क्षेत्रों में सुधा उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर बिक्री नेटवर्क विकसित करने का लक्ष्य बताया गया है।
इसके साथ ही पंचायतों में ‘सुधा सखी’ के चयन और उन्हें प्रधानमंत्री इंटर्नशिप योजना के तहत प्रशिक्षण देने की पहल का भी उल्लेख किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य ग्रामीण स्तर पर डेयरी नेटवर्क से जुड़ी गतिविधियों को बढ़ावा देना है।
दूध की मात्रा और गुणवत्ता के आधार पर मिलेगा भुगतान
दूध उत्पादकों के लिए पारदर्शी भुगतान व्यवस्था विकसित करने के उद्देश्य से डेटा प्रोसेसर आधारित मिल्क कलेक्शन यूनिट यानी DPMCU स्थापित की जा रही हैं।
इन इकाइयों के माध्यम से दूध की मात्रा और गुणवत्ता का आकलन किया जा सकेगा। इससे दूध की खरीद प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और भुगतान में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
रिपोर्ट में उत्पादकों के बैंक खातों में सीधे भुगतान की व्यवस्था को मजबूत करने की बात भी कही गई है। इससे भुगतान संबंधी जानकारी का रिकॉर्ड रखने और लेनदेन को अधिक पारदर्शी बनाने में सहायता मिल सकती है।
पशुपालकों को क्या होगा फायदा?
सुधा नेटवर्क के विस्तार से ग्रामीण पशुपालकों को कई तरह के लाभ मिलने की संभावना है:
- दूध बेचने के अधिक अवसर: नई समितियों के जरिए स्थानीय स्तर पर दूध संग्रहण की सुविधा बढ़ सकती है।
- सहकारी व्यवस्था से जुड़ाव: छोटे दूध उत्पादकों को संगठित बाजार तक पहुंचने में मदद मिल सकती है।
- गुणवत्ता के आधार पर मूल्यांकन: तकनीकी इकाइयों के जरिए दूध की मात्रा और गुणवत्ता दर्ज की जा सकेगी।
- पारदर्शी भुगतान: बैंक खाते में भुगतान की व्यवस्था को मजबूत करने से लेनदेन का रिकॉर्ड बेहतर हो सकता है।
- ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा: दूध उत्पादन और विपणन का नेटवर्क बढ़ने से पशुपालन से जुड़े अवसर विकसित हो सकते हैं।
हालांकि, इन लाभों का वास्तविक प्रभाव स्थानीय समितियों की सक्रियता, दूध की खरीद दर और भुगतान की नियमितता पर निर्भर करेगा।
निष्कर्ष
बिहार में सुधा नेटवर्क का विस्तार ग्रामीण दुग्ध उत्पादकों के लिए महत्वपूर्ण पहल साबित हो सकता है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, 4,800 नई समितियां गठित की गई हैं और इनमें से 2,150 सक्रिय हैं। इनके माध्यम से प्रतिदिन करीब 91 हजार किलोग्राम अतिरिक्त दूध एकत्र किया जा रहा है।
आने वाले समय में पंचायत स्तर पर बिक्री केंद्रों और आधुनिक दूध संग्रहण इकाइयों का विस्तार होने से सहकारी डेयरी व्यवस्था को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
BHARATSUPERFASTNEWS पर पढ़ते रहें बिहार की कृषि, पशुपालन, रोजगार और ग्रामीण विकास से जुड़ी ताजा खबरें।
