पटना: बिहार सरकार ने आम नागरिकों की शिकायतों के त्वरित समाधान के उद्देश्य से राज्यस्तरीय ‘सहयोग’ कार्यक्रम की शुरुआत की है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मुख्यमंत्री सचिवालय परिसर में आयोजित कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर आवेदन प्राप्ति केंद्र का शुभारंभ और मुख्यमंत्री सचिवालय तक बनाए गए ‘सहयोग पथ’ का भी लोकार्पण किया गया।
कार्यक्रम के पहले दिन राज्य के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। कुल 129 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 100 आवेदक स्वयं उपस्थित होकर अपनी शिकायतें मुख्यमंत्री के समक्ष रखीं। मुख्यमंत्री ने कई मामलों में संबंधित अधिकारियों को मौके पर ही आवश्यक निर्देश दिए तथा सभी शिकायतों के निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण पर जोर दिया।
शिकायतों के समाधान पर सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रत्येक आवेदन का पारदर्शी और गुणवत्तापूर्ण तरीके से निपटारा सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि किसी अधिकारी की लापरवाही या उदासीनता के कारण शिकायतों के समाधान में देरी होती है, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को जिला स्तर पर हुई कार्रवाई से संतोष नहीं है, तो राज्यस्तरीय ‘सहयोग’ कार्यक्रम के माध्यम से उसके मामले की दोबारा समीक्षा की जाएगी, ताकि न्यायपूर्ण निर्णय सुनिश्चित हो सके।
सोलर योजना के प्रचार पर जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को राज्य सरकार की सोलर योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार करने का निर्देश दिया। उन्होंने बताया कि योजना के तहत 125 यूनिट तक मुफ्त बिजली की सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। साथ ही यदि उपभोक्ता इससे अधिक बिजली का उत्पादन करता है, तो अतिरिक्त बिजली के बदले आर्थिक लाभ भी प्राप्त कर सकता है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्रों में ‘सोलर विलेज’ विकसित करने की दिशा में भी कार्य तेज करने की बात कही।
लंबित पेंशन मामलों के शीघ्र निपटारे का निर्देश
बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं की समीक्षा करते हुए निर्देश दिया कि पात्र लाभार्थियों के लंबित आवेदनों का जल्द निस्तारण किया जाए और अगले महीने की 10 तारीख तक पेंशन राशि उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। उन्होंने यह भी कहा कि दस्तावेजों की कमी होने पर आवेदन सीधे अस्वीकार न किए जाएं, बल्कि आवेदकों को आवश्यक कागजात जमा करने का अवसर दिया जाए।
सड़क निर्माण और प्रशासनिक जवाबदेही पर भी जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश का मौसम समाप्त होने के बाद सड़क निर्माण कार्यों में तेजी लाई जाए। उन्होंने प्रशासनिक अधिकारियों से आम नागरिकों के साथ संवेदनशील और सम्मानजनक व्यवहार करने तथा शिकायतों के समाधान की नियमित समीक्षा करने को भी कहा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि कोई मामला मुख्यमंत्री स्तर तक पहुंचता है, तो यह संकेत है कि निचले स्तर पर उसका संतोषजनक समाधान नहीं हुआ। इसलिए सीओ, बीडीओ, एसडीओ, डीसीएलआर, जिलाधिकारी, प्रमंडलीय आयुक्त और विभागीय सचिव अपने-अपने स्तर पर शिकायतों की नियमित निगरानी करें।
90 प्रतिशत मामलों के समाधान का दावा
मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक आयोजित सहयोग शिविरों के माध्यम से लगभग 90 प्रतिशत शिकायतों का समाधान किया जा चुका है। उन्होंने अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रत्येक नागरिक को समयबद्ध और प्रभावी न्याय दिलाना है। उनके अनुसार, राज्यस्तरीय ‘सहयोग’ कार्यक्रम प्रशासन और जनता के बीच संवाद को मजबूत करने तथा सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल साबित होगा।
कार्यक्रम में दोनों उपमुख्यमंत्री, विभिन्न विभागों के मंत्री, मुख्य सचिव, पुलिस महानिदेशक तथा कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे।


