Monday, March 9, 2026

बिहार में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 60-90% तक अनुदान दे रही है।

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बिहार में बकरी पालन को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार 60-90% तक अनुदान दे रही है। मंत्री सुरेंद्र मेहता ने इसे गरीब परिवारों के लिए ‘एटीएम’ बताया, क्योंकि बिहार की जलवायु इसके लिए अनुकूल है।

पटना। बकरी पालन गरीब परिवारों के लिए एटीएम की तरह है। जरूरत पड़ने पर किसान इसे बेचकर तुरंत आर्थिक लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

बिहार की जलवायु बकरी पालन के लिए अनुकूल है और यहां इसके विकास की असीम संभावनाएं हैं। ये बातें सोमवार को डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री सुरेंद्र मेहता ने कहीं। वह जलवायु अनुकूल बकरी पालन एवं प्रबंधन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।

बकरी पालन के लिए बिहार की जलवायु अनुकूल

मंत्री ने कहा कि राज्य सरकार बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए 60 से 90 प्रतिशत तक अनुदान दे रही है। इसके लिए बड़े पैमाने पर किसानों को प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है।

आने वाले दिनों में बकरी के मांस के साथ-साथ इसके दूध के व्यवसाय को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा। बकरी के दूध का बाजार मूल्य अधिक होता है, जिससे किसानों को बेहतर आय प्राप्त हो सकती है।

कार्यक्रम में विभाग के सचिव शीर्षत कपिल अशोक ने कहा कि बकरी के दूध की बाजार में काफी मांग है। ऐसे में किसानों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराने के लिए इसे सुधा (Sudha) के माध्यम से बेचने की योजना पर काम किया जा रहा है।

राज्य सरकार बकरी पालन पर दे रही है 60 से 90 प्रतिशत का अनुदान

साथ ही बकरी पालकों को उचित लाभ मिल सके, इसके लिए मांस के व्यवसाय को भी व्यवस्थित करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

इस मौके पर बिहार एनिमल साइंस यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. इंद्रजीत सिंह ने कहा कि बिहार में रोजगार सृजन योजना के तहत पशुपालन महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

पशुओं से जुड़ी चिकित्सा सुविधाओं और शोध को मजबूत कर बकरी पालन को और अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है। वहीं Central Institute for Research on Goats के निदेशक डॉ. मनीष कुमार चाटली ने कहा कि बकरे के मांस की मांग के साथ-साथ बकरी के दूध और पनीर की कीमत भी बाजार में अधिक है।

बकरी का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होता है और यह इम्यूनिटी बढ़ाने में भी मददगार माना जाता है। इस दौरान पशुपालन निदेशक उज्ज्वल कुमार सिंह, नाबार्ड के महाप्रबंधक अजय साहू सहित कई अन्य विशेषज्ञों ने भी अपने विचार रखे।

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