बिहार में प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) योजना के तहत पिछले वित्तीय वर्ष में 49,622.73 करोड़ रुपये सीधे 17.37 करोड़ लाभार्थियों के खातों में भेजे गए। इस व्यवस्था ने बिचौलियों की भूमिका समाप्त कर पारदर्शिता बढ़ाई है
पटना। हर नई व्यवस्था को लेकर हीला-हुज्जत का एक दौर-सा चलता है। प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) योजना के साथ भी कुछ ऐसी ही स्थिति रही थी।
चूंकि सरकार का स्पष्ट निर्देश था, लिहाजा कोताहियों के लिए गुंजाइश ही नहीं बची। अब नकदी अंतरण की इस व्यवस्था का प्रत्यक्ष लाभ दिखने लगा है।
इसने बिचौलियों की भूमिका लगभग समाप्त-सी कर दी है। परिणामस्वरूप अब जन-कल्याणकारी योजनाओं की पूरी रकम लाभुकों को मिल रही।
पूर्वी चंपारण के बाद समस्तीपुर और मधुबनी मेंं सर्वाधिक राशि का वितरण
रुपये में 85 पैसे इधर-उधर बंट जाने की नौबत ही नहीं रही। पिछले वित्तीय वर्ष (2025-26) में डीबीटी के जरिये बिहार के लिए केंद्र से 49622.73 करोड़ रुपये जारी हुए और सारी रकम लाभुकों के खाते में सीधे पहुंची।
बिहार में डीबीटी लाभार्थियों की कुल संख्या 17.37 करोड़ है, जिनमें सर्वाधिक 87 लाख पूर्वी चंपारण जिला से हैं।
डीबीटी मोदी सरकार की बेहतरीन उपलब्धियों मेंं से एक है। सत्ता के शुरुआती वर्षों में ही उन्होंने इस परिकल्पना को साकार किया था।
49622.73 करोड़ रुपये मिले बिहार को पिछले वित्तीय वर्ष में
हालांकि, बिहार में उससे लगभग सात-आठ वर्ष पहले से कुछ योजनाओं में डीबीटी जैसी व्यवस्था थी। इंदिरा आवास, साइकिल और पोशाक योजना आदि की राशि सीधे लाभुकों के खाते मेंं भेजी जा रही थी
उसका क्रांतिकारी परिणाम सामने आया। बाद में यह व्यवस्था सर्वव्यापी हो गई और अब अनुदान या आर्थिक सहायता प्रदान करने के लिए इसे ही सर्वोत्तम उपाय माना जा रहा है।
दरअसल, इसके कारण बिचौलियों के समाप्त होने से पारदर्शिता बढ़ी है और भ्रष्टाचार पर रोक लगी है। मानवीय हस्तक्षेप कम हुआ है, लिहाजा धन का रिसाव बंद हुआ है।
पूरे देश में बंटे 6.17 लाख करोड़
पहले योजनाओं की राशि नकद या चेक से बंटती थी, जिसमें धांधली की गुंजाइश रहती थी। अब डिजिटल माध्यम से पूरा पैसा तय समय पर सीधे लाभार्थी तक पहुंचता है।
सरकारी योजनाओं का सटीक लाभ उठाने के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि बैंक खाता आधार से लिंक हो।
328 योजनाओं में डीबीटी : अभी कुल 328 योजनाओं में केंद्र द्वारा डीबीटी की व्यवस्था है। इनके अंतर्गत 2025-26 में पूरे देश में 6.17 लाख करोड़ रुपये डीबीटी के जरिये लाभुकों के बैंक खाते में सीधे गए।
मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश को बिहार से अधिक राशि मिली। इसका एक कारण लाभार्थियों की संख्या रही। दूसरा कारण, योजनाओं के लिए देय राशि में अंतर रहा।
बिहार में सर्वाधिक राशि क्रमश: पूर्वी चंपारण, समस्तीपुर और मधुबनी के लाभुकों को मिली है।
देश में प्रमुख राज्यवार डीबीटी स्थिति
| राज्य | लाभार्थी (करोड़ में) | डीबीटी निधि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|---|
| बिहार | 17.37 | 49,622.73 |
| मध्य प्रदेश | 14.33 | 53,480.83 |
| महाराष्ट्र | 18.14 | 63,731.69 |
| उत्तर प्रदेश | 32.78 | 88,353.49 |
बिहार के प्रमुख जिलों का ब्योरा
| जिला | लाभार्थी (लाख में) | डीबीटी निधि (करोड़ रुपये में) |
|---|---|---|
| पूर्वी चंपारण | 87 | 2,672.50 |
| पटना | 84 | 1,985.86 |
| मुजफ्फरपुर | 81 | 1,972.82 |
| मधुबनी | 78 | 2,016.01 |
| समस्तीपुर | 75 | 2,017.57 |
| गया | 68 | 1,890.14 |
| पश्चिम चंपारण | 67 | 1,893.59 |
| दरभंगा | 67 | 1,546.75 |
| वैशाली | 60 | 1,762.82 |
| सारण | 62 | 1,789.18 |


