Tuesday, March 17, 2026

बिहार में पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

Share

बिहार में पटना-गया-डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने इसकी समीक्षा की। इस परियोजना के तहत 65 किमी क्षेत्र में 21 हजार से अधिक फलदार पौधे लगाए जाएंगे।

पटना। बिहार में पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ी पहल शुरू होने जा रही है। मंगलवार को विभागीय मंत्री प्रमोद कुमार चंद्रवंशी ने इसकी समीक्षा की। 

पटना–गया–डोभी राष्ट्रीय राजमार्ग (NH) को ‘ग्रीन कॉरिडोर’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत सड़क के दोनों किनारों पर बड़े पैमाने पर फलदार पौधों का रोपण किया जाएगा।

तीन वर्षों में 65 किमी क्षेत्र में हरियाली

पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की इस योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक गया वन प्रमंडल (गया जी) के अंतर्गत 65 किलोमीटर क्षेत्र में 21 हजार से अधिक पौधे लगाए जाएंगे।

सामुदायिक भागीदारी पर जोर

इस परियोजना को स्थानीय जनप्रतिनिधियों, मुखिया, पंचायत सदस्यों, जिला पार्षदों, विधायकों और जिला प्रशासन के सहयोग से लागू किया जाएगा।

किसानों की रैयती जमीन पर वृक्षारोपण कर कम्युनिटी फार्मिंग’ मॉडल को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे हरित आवरण बढ़ने के साथ किसानों की आय में भी वृद्धि होगी। 

प्रशिक्षण और प्रोत्साहन

विभागीय मंत्री ने समीक्षा बैठक में अधिकारियों को विस्तृत मार्गदर्शिका तैयार करने, गुणवत्तापूर्ण पौधारोपण सुनिश्चित करने तथा किसानों को प्रशिक्षण देने के निर्देश दिए।

किसानों को पौधों की देखभाल, तकनीकी जानकारी और आर्थिक लाभ के संबंध में प्रशिक्षित किया जाएगा। साथ ही उन्हें प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाएगी।

एकरूप हरित पट्टी की योजना

योजना के तहत हर 5 किलोमीटर के दायरे में एक ही प्रकार के फलदार वृक्ष लगाए जाएंगे, जिससे एक समान हरित पट्टी विकसित हो सके।

इसमें आम, अमरूद, जामुन, लीची, कटहल, आंवला, बेल, नींबू, सहजन, नीम, बरगद, पीपल और पाकड़ जैसे पौधे शामिल होंगे। इससे न केवल सड़क की सुंदरता बढ़ेगी, बल्कि स्थानीय फलों के उत्पादन से बाजार को भी मजबूती मिलेगी। 

मधुमक्खी पालन को भी बढ़ावा

पेट्रोल पंपों के आसपास खाली भूमि पर भी पौधारोपण किया जाएगा। इससे मधुमक्खी पालन जैसे सहायक रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा।

विशेष रूप से सहजन के पेड़ों से उच्च गुणवत्ता वाले शहद के उत्पादन की संभावना किसानों के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बनेगी।

परियोजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए निदेशक हरियाली मिशन को नोडल बनाया गया है। आगामी 19 मार्च को स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ इंटरैक्टिव सेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें हरित आवरण बढ़ाने की रणनीतियों पर चर्चा होगी।

बैठक में मौजूद रहे

इस समीक्षा बैठक में विभाग के अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर, पीसीसीएफ हॉफ पी.के. गुप्ता, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) अरविंदर सिंह, अपर पीसीसीएफ (कैंपा) सह नोडल अधिकारी सुरेंद्र कुमार, अपर पीसीसीएफ सह मुख्य वन्यप्राणी प्रतिपालक अभय कुमार, सीसीएफ सह निदेशक हरियाली मिशन एस. चंद्रशेखर आदि उपस्‍थ‍ित थे। 

पटना–गया–डोभी एनएच बनेगा ग्रीन कॉरिडोर, 65 किमी में लगेंगे 21 हजार पौधे

Read more

Local News