बिहार में धान खरीद का लक्ष्य 36.85 लाख टन है, जिसमें से 18.76 लाख टन की खरीद हो चुकी है। सरकार गड़बड़ी रोकने के लिए सख्त है, लेकिन बिचौलियों की सक्रियता से छोटे किसानों के नाम पर फर्जीवाड़ा जारी है। सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने पारदर्शिता और किसानों के हितों की रक्षा का आश्वासन दिया है, पर जमीनी हकीकत अलग है, जहां बिचौलिए कम दाम पर धान खरीदकर मुनाफा कमा रहे हैं।
पटना। बिहार में इस वर्ष 36.85 लाख टन धान की खरीद का लक्ष्य है। इसके विरुद्ध अब तक 18 लाख 76 हजार टन धान की खरीद हो चुकी है। केंद्र सरकार ने 28 फरवरी तक धान खरीद का समय तय किया है।
प्रदेश में धान की खरीद में गड़बड़ी एवं फर्जीवाड़े रोकने के लिए कई स्तरों पर प्रशासनिक व्यवस्था हुई है। सख्ती भी बरती जा रही है कि क्रय केंद्रों पर कोई गड़बड़ी नहीं हो, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और है।
छोटे किसानों के नाम पर अधिक धान की खरीदी
छोटे किसानों के नाम पर अधिक धान की बिक्री कागज पर दिखाई जा रही है। माना जा रहा है कि बिचौलिये और व्यापारियों की मिलीभगत से इस बार भी बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हो रही है।
वर्ष 2025-26 में केंद्र से तय न्यूनतम समर्थन मूल्य पर 2369 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद हो रही है। 2024-25 में 2300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीद हुई थी।
किसानों को राशि का भुगतान
राज्य सरकार ने किसानों की सुविधा के लिए 6870 पैक्सों एवं 500 से अधिक व्यापार मंडलों में धान खरीद की व्यवस्था की है। अभी तक सरकारी क्रय केंद्रों पर 2,69,685 किसानों ने धान बेचा है। इनमें 2,48,586 किसानों (92.34 प्रतिशत) को राशि भुगतान किया जा चुका है।
सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार के मुताबिक विभाग ने 23-24 जनवरी को सभी 38 जिलों में धान खरीद को लेकर राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान चलाया। यह अभियान धान अधिप्राप्ति कार्य के प्रभावी क्रियान्वयन, सतत निगरानी एवं पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चलाया गया।
इस अभियान के तहत 800 पदाधिकारियों द्वारा कम से कम दो पैक्सों या व्यापार मंडलों का स्थल निरीक्षण किया गया।
व्यवस्था की खामी, बिचौलिये को फायदा
प्रदेश में 2,369 प्रति क्विंटल धान की दर के बावजूद बिचौलिए सक्रिय हैं। मुंगेर, जमुई, सहरसा, कटिहार, रोहतास जैसे क्षेत्रों में पंजीकरण और बायोमीट्रिक में देरी का फायदा उठाकर बिचौलिए किसानों से 2100-2200 रुपये क्विंटल पर धान खरीदकर मिलर्स को 2,369 की दर पर खपाने की शिकायतें आ रही हैं।
अधिकारी केंद्र प्रभारियों के संपर्क में तो हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर दबंग पैक्स अध्यक्षों और दलालों का दबदबा होने की बात आम है।
जानकारों का कहना है कि प्रदेश में धान खरीदी पूरी होने के बाद गोदामों में रखे जाने वाले धान की जांच कराई जाए, तो घोटाले का आंकड़ा कई गुना बढ़ सकता है। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूर्ति होती है।
सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद कुमार ने निरीक्षण
राज्य सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ बिना किसी बाधा के मिले, यह सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। धान खरीद में किसी प्रकार की गड़बड़ी पर जिलाधिकारियों को कार्रवाई करने का निर्देश जारी है। अगर धान खरीद कार्य में किसी भी स्तर पर स्थानीय पदाधिकारी या पैक्स व व्यापार मंडल के अध्यक्ष द्वारा लापरवाही अथवा अनियमितता बरती जाती है तो उसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और दोषी पाए जाने पर संबंधित के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।– सहकारिता मंत्री डॉ. प्रमोद
🌾 बिहार में विगत 6 वर्षों की धान अधिप्राप्ति
| वर्ष | लक्ष्य (लाख टन) | लाभान्वित किसान (लाख) | धान प्राप्ति (लाख टन) | प्राप्ति % |
|---|---|---|---|---|
| 2019-20 | 30 | 2.79 | 20.01 | 66.7% |
| 2020-21 | 45 | 4.97 | 35.58 | 79.1% |
| 2021-22 | 45 | 6.42 | 44.09 | 97.98% |
| 2022-23 | 45 | 5.77 | 42.04 | 93.42% |
| 2023-24 | 45 | 3.72 | 30.79 | 68.42% |
| 2024-25 | 45 | 3.45 | 40.00 | 88.89% |
कुल मिलाकर 2021-22 में लक्ष्य के सबसे करीब पहुंचा गया (97.98%)। 2023-24 में प्राप्ति सबसे कम रही। 2024-25 में अभी तक 88.89% प्राप्ति दर्ज।


