पटना: बिहार में बंद पड़ी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की दिशा में सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनर्जीवन कार्य का शिलान्यास 20 नवंबर को किया जाएगा। इस कार्यक्रम के साथ राज्य में चीनी उद्योग को दोबारा मजबूत करने की योजना को गति मिलने की उम्मीद है।
राज्य सरकार ने चीनी उद्योग के विस्तार के लिए 25 नई चीनी मिलें स्थापित करने का लक्ष्य भी तय किया है। सरकार का कहना है कि इससे गन्ना किसानों को बेहतर बाजार मिलेगा, उनकी आमदनी बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
एक से दो साल में शुरू हो सकता है उत्पादन
गन्ना उद्योग विभाग के अधिकारियों के अनुसार, सकरी और रैयाम चीनी मिलों के पुनर्निर्माण के बाद करीब एक से दो वर्षों के भीतर उत्पादन शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए गन्ने की खेती का क्षेत्र बढ़ाने और किसानों को इस फसल के लिए प्रोत्साहित करने की योजना पर भी काम किया जा रहा है।
अधिकारियों का मानना है कि पर्याप्त मात्रा में गन्ना उपलब्ध होने से मिलों का संचालन सुचारू रूप से हो सकेगा और राज्य के चीनी उद्योग को स्थायी आधार मिलेगा।
बंद मिलों को दोबारा चालू करने पर जोर
गन्ना उद्योग मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने और किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के उद्देश्य से चीनी क्षेत्र में निवेश बढ़ा रही है। नई मिलों की स्थापना के साथ-साथ लंबे समय से बंद पड़ी इकाइयों को फिर से शुरू करने की योजना बनाई गई है।
सरकार के अनुसार, यह पहल मुख्यमंत्री के ‘सात निश्चय-3’ के तहत ‘समृद्ध उद्योग, सशक्त बिहार’ अभियान का हिस्सा है।
किसानों और रोजगार को मिलेगा लाभ
सरकार का दावा है कि चीनी मिलों के पुनरुद्धार से गन्ना उत्पादकों को अपनी उपज बेचने के लिए बेहतर व्यवस्था मिलेगी। इसके अलावा मिलों के संचालन से स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
राज्य सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं के माध्यम से बिहार का चीनी उद्योग फिर से अपनी पुरानी पहचान हासिल कर सकेगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
