पटना, 4 नवंबर 2026। बिहार सरकार ने राज्य में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के लिए कच्चे माल की उपलब्धता आसान बनाने की पहल की है। इसके तहत अब राज्य में संचालित पशु आहार निर्माण इकाइयां दूसरे राज्यों से छोआ मंगा सकेंगी। वहीं, बायोडीजल और फार्मलडीहाइड सहित विभिन्न रासायनिक उत्पादों के निर्माण में इस्तेमाल होने वाले मेथनॉल को भी दूसरे राज्यों से लाने की अनुमति दी गई है।
पशु आहार उद्योग को मिलेगी कच्चे माल की कमी से राहत
विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकार के इस फैसले से बिहार की कैटल फीड निर्माण इकाइयों को कच्चे माल की उपलब्धता बढ़ाने में मदद मिलेगी। छोआ पशु आहार तैयार करने में इस्तेमाल होने वाला महत्वपूर्ण कच्चा माल है।
इसकी आपूर्ति आसान होने से पशु आहार उद्योग को राहत मिलने और निवेश के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है। साथ ही, बेहतर गुणवत्ता वाला पशु आहार तैयार करने में भी मदद मिल सकती है। इससे पशुओं की सेहत और दुग्ध उत्पादन को भी लाभ पहुंचने की संभावना है।
मेथनॉल से कई उद्योगों को फायदा
मेथनॉल की उपलब्धता आसान होने से बिहार के रासायनिक उद्योगों को भी सीधा लाभ मिल सकता है। इसका इस्तेमाल बायोडीजल और फार्मलडीहाइड के निर्माण के अलावा कई अन्य रासायनिक उत्पाद तैयार करने में किया जाता है।
मेथनॉल की आपूर्ति सुगम होने से पेंट, प्लाईवुड, रेजिन, ईंधन, दवा और रसायन से जुड़ी औद्योगिक इकाइयों को कच्चा माल जुटाने में सहूलियत होगी।
निवेश और औद्योगिक विस्तार पर सरकार का जोर
सरकार की इस पहल का मुख्य उद्देश्य राज्य की औद्योगिक इकाइयों को जरूरी कच्चा माल आसानी से उपलब्ध कराना है। इससे उत्पादन संबंधी बाधाएं कम करने, नए निवेश को आकर्षित करने और बिहार में औद्योगिक गतिविधियों का विस्तार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
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