पटना, 16 अक्टूबर 2026: बिहार में अपार्टमेंट के फ्लैट खरीदने वाले लोगों को दाखिल-खारिज के मामले में राहत मिलने की उम्मीद है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग फ्लैटों की दाखिल-खारिज की प्रक्रिया दोबारा शुरू करने के लिए अध्यादेश लाने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार किया गया है, जबकि कानूनी प्रावधानों को लेकर विधि विभाग की मंजूरी की प्रक्रिया जारी है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, मंजूरी मिलने के बाद राज्यपाल के माध्यम से अध्यादेश लाकर नई व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसके बाद सॉफ्टवेयर के जरिए फ्लैटों की दाखिल-खारिज शुरू की जा सकेगी। इस व्यवस्था को विधिवत मंजूरी दिलाने के लिए विधानमंडल के शीतकालीन सत्र में भी प्रक्रिया अपनाई जाएगी।
अप्रैल 2025 से रुकी हुई है प्रक्रिया
बिहार में अपार्टमेंट की जमीन का फ्लैटधारियों के नाम दाखिल-खारिज, नामांतरण और जमाबंदी सृजन की प्रक्रिया अप्रैल 2025 से रोकी गई थी। उस समय राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने प्रमंडलीय आयुक्तों और जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश जारी किए थे।
इस रोक के कारण फ्लैट खरीदने वाले कई लोगों को अपने नाम पर दाखिल-खारिज कराने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अब नई व्यवस्था लागू होने से इस समस्या का समाधान निकलने की उम्मीद है।
कानून में स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से आई थी समस्या
विभागीय जानकारी के अनुसार, बिहार भूमि दाखिल-खारिज अधिनियम, 2011 और नियमावली, 2012 में अपार्टमेंट के फ्लैटधारियों के नाम आनुपातिक भूमि की दाखिल-खारिज करने की स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी। पुराने सॉफ्टवेयर में भी इसके लिए आवश्यक प्रावधान उपलब्ध नहीं थे।
इसी वजह से अलग-अलग अंचलों में फ्लैटों की दाखिल-खारिज के मामलों में अलग-अलग तरीके अपनाए जा रहे थे। इससे प्रक्रिया में एकरूपता और स्पष्टता की समस्या पैदा हो रही थी।
फ्लैट के साथ जमीन में मिलता है आनुपातिक हिस्सा
अपार्टमेंट में फ्लैट की रजिस्ट्री के समय खरीदार को संबंधित जमीन में आनुपातिक हिस्सा भी मिलता है। हालांकि, इस हिस्से को सामान्य जमीन की तरह किसी निश्चित भौगोलिक भाग के रूप में अलग से चिह्नित करना आसान नहीं होता।
इस तकनीकी और कानूनी जटिलता के कारण फ्लैट खरीदारों के नाम दाखिल-खारिज करने में दिक्कतें आ रही थीं। नई व्यवस्था में अपार्टमेंट की जमीन और फ्लैटधारियों के आनुपातिक हिस्से से जुड़े रिकॉर्ड को सॉफ्टवेयर के माध्यम से व्यवस्थित करने की योजना है।
नया सॉफ्टवेयर तैयार, कानूनी मंजूरी का इंतजार
विभाग ने दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को अधिक स्पष्ट और तकनीकी रूप से व्यवस्थित बनाने के लिए नया सॉफ्टवेयर तैयार किया है। हालांकि, इसे लागू करने के लिए आवश्यक कानूनी प्रावधानों को मंजूरी मिलना अभी अहम चरण है।
अध्यादेश और संबंधित नियम लागू होने के बाद फ्लैटों की दाखिल-खारिज की प्रक्रिया शुरू होने का रास्ता खुल सकता है। इससे खरीदारों को अंचल कार्यालयों में बार-बार जाने की परेशानी कम होने की उम्मीद है।
फ्लैट खरीदारों को क्या फायदा होगा?
नई व्यवस्था लागू होने पर फ्लैटधारियों के भूमि संबंधी रिकॉर्ड को व्यवस्थित करने और दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में एकरूपता लाने में मदद मिल सकती है। इससे संपत्ति से जुड़े दस्तावेजों के प्रबंधन में भी सुविधा होने की उम्मीद है।
हालांकि, आवेदन की प्रक्रिया, जरूरी दस्तावेजों और नई व्यवस्था लागू होने की निश्चित तारीख को लेकर अंतिम जानकारी आधिकारिक अधिसूचना जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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