Tuesday, March 24, 2026

बिहार के कला एवं संस्कृति सचिव प्रणव कुमार ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात कर उन्हें ‘बिहार दिवस’ पर आमंत्रित किया।

Share

बिहार के कला एवं संस्कृति सचिव प्रणव कुमार ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात कर उन्हें ‘बिहार दिवस’ पर आमंत्रित किया। इस दौरान मिथिला और मधुबनी पेंटिंग के प्रचार-प्रसार पर चर्चा हुई।

पटना। बिहार के कला एवं संस्कृति विभाग के सचिव प्रणव कुमार ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से शिष्टाचार मुलाकात की और उन्हें ‘बिहार दिवस’ पर बिहार आने का औपचारिक न्योता दिया। इस अवसर पर दोनों पक्षों ने मिथिला चित्रकला और मधुबनी पेंटिंग के प्रचार-प्रसार को बढ़ावा देने पर विशेष चर्चा की।

मिथिला पेंटिंग में बढ़ेगा सहयोग

सचिव प्रणव कुमार ने बताया कि मॉरीशस में मिथिला पेंटिंग सीखने के इच्छुक कई लोग हैं।

ऐसे में प्रशिक्षण कार्यक्रम, कार्यशालाओं, ऑनलाइन कक्षाओं और प्रदर्शनी के माध्यम से दोनों देशों के कलाकारों को साझा मंच उपलब्ध कराया जाएगा। इस पहल से बिहार की कला अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान पाएगी।

साझा प्रशिक्षण और प्रदर्शनी की योजना

बैठक के दौरान दोनों देशों ने प्राचीन पांडुलिपियों के संरक्षण, डिजिटाइजेशन और प्रदर्शनी पर संयुक्त प्रयास करने पर सहमति व्यक्त की।

पांडुलिपियों को ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहर मानते हुए, तकनीकी सहयोग, डिजिटाइजेशन प्रोजेक्ट और शोध कार्य को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान को मिलेगी गति

इस यात्रा में सचिव प्रणव कुमार ने भारत के मॉरीशस उच्चायुक्त से भी मुलाकात की और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों को और सक्रिय बनाने पर विचार-विमर्श किया। उन्होंने मॉरीशस के प्रतिनिधियों को बिहार दिवस पर बिहार आने का औपचारिक निमंत्रण दोहराया।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान की दिशा

सचिव ने कहा कि मिथिला पेंटिंग बिहार की सांस्कृतिक पहचान है। मॉरीशस में इस कला के प्रति विशेष रुचि देखी जा रही है। भविष्य में सांस्कृतिक विनिमय कार्यक्रम, कलाकार शिविर और संयुक्त प्रदर्शनी आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है

तकनीकी सहयोग और डिजिटाइजेशन

दोनों पक्षों ने डिजिटाइजेशन, शोध और प्रदर्शनी के माध्यम से बिहार और मॉरीशस के बीच कला एवं संस्कृति के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर जोर दिया। इसके जरिए कलाकारों और शोधकर्ताओं को वैश्विक मंच पर साझा अवसर मिलेगा।

भविष्य में संयुक्त पहल

इस पहल से न केवल मिथिला पेंटिंग को अंतरराष्ट्रीय मान्यता मिलेगी, बल्कि दोनों देशों के कलाकार और सांस्कृतिक विद्वान साझा कार्यक्रमों और कार्यशालाओं में भाग लेकर कला के क्षेत्र में नई ऊँचाइयां छू सकेंगे।

Read more

Local News