Friday, October 23, 2026

बिहार के 212 बालू घाटों पर नए नियम लागू, लापरवाही पर 10 लाख रुपये तक जुर्माना.

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पटना: बिहार में बालू खनन और उठाव को लेकर नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए सख्ती बढ़ा दी गई है। राज्य के 212 बालू घाटों पर 16 अक्टूबर 2026 से खनन और बालू उठाव शुरू होने के साथ ही निर्धारित प्रावधानों का पालन अनिवार्य किया गया है। नियमों की अनदेखी करने वाले बालू घाटों के पट्टाधारियों पर एक लाख रुपये से लेकर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

नियमों के तहत घाटों पर सुरक्षा, निगरानी, सीमा चिह्नांकन, धूल नियंत्रण और खनन से संबंधित रिकॉर्ड रखना जरूरी है। इसके अलावा, खनन योजना के अनुसार पौधरोपण नहीं करने पर भी आर्थिक दंड का प्रावधान किया गया है।

बिहार गजट में प्रकाशित हैं जुर्माने के प्रावधान

उपलब्ध रिपोर्ट के मुताबिक, बालू घाटों के संचालन से संबंधित ये प्रावधान 6 मई 2026 को बिहार गजट में प्रकाशित किए गए थे। इनके तहत जिलाधिकारी यानी समाहर्ता को नियमों का उल्लंघन करने वाले पट्टाधारियों के खिलाफ निर्धारित कार्रवाई करने का अधिकार दिया गया है।

इस व्यवस्था का उद्देश्य बालू खनन के दौरान निगरानी मजबूत करना, नियमों का पालन सुनिश्चित करना और पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी पर रोक लगाना है।

साइन बोर्ड नहीं लगाने पर एक लाख रुपये का जुर्माना

बालू घाटों पर जरूरी सूचना और पहचान से संबंधित व्यवस्थाएं रखना अनिवार्य होगा। रिपोर्ट में बताए गए जुर्माने के प्रावधान इस प्रकार हैं:

  • साइन बोर्ड नहीं लगाने पर: 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • घाट की सीमा चिह्नित नहीं करने पर: 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • धूल रोकने के लिए पानी का छिड़काव नहीं करने पर: 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं रखने पर: 1 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • समय पर मासिक रिटर्न अपलोड नहीं करने पर: 1 लाख रुपये तक जुर्माना।

इन व्यवस्थाओं का उद्देश्य खनन स्थल पर पारदर्शिता, सुरक्षा और नियमित निगरानी बनाए रखना है।

खनन और ढुलाई का हिसाब रखना अनिवार्य

बालू घाटों के पट्टाधारियों को खनन और बालू की ढुलाई से संबंधित रिकॉर्ड व्यवस्थित रखना होगा। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, खनन और परिवहन का हिसाब नहीं रखने पर 10 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।

इसके साथ ही, विभागीय पोर्टल पर निर्धारित समय सीमा के भीतर मासिक रिटर्न अपलोड करना भी जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई हो सकती है।

पौधरोपण में कमी पर भी लगेगा भारी जुर्माना

बालू खनन के दौरान पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए खनन योजना के मुताबिक पौधे लगाना भी जरूरी होगा। रिपोर्ट में पौधरोपण से संबंधित जुर्माने का विवरण इस प्रकार दिया गया है:

  • 50 पेड़ तक की कमी होने पर: 5 लाख रुपये तक जुर्माना।
  • 50 पेड़ों से अधिक की कमी होने पर: 5 लाख रुपये के अतिरिक्त प्रत्येक पेड़ के लिए 2,000 रुपये का जुर्माना।

इस प्रावधान के जरिए खनन गतिविधियों के साथ पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के पालन पर जोर दिया गया है।

बालू घाटों की निगरानी पर रहेगा जोर

नए नियमों के तहत बालू घाटों पर संचालन से जुड़ी व्यवस्थाओं और रिकॉर्ड की निगरानी महत्वपूर्ण होगी। पट्टाधारियों को निर्धारित मानकों का पालन करना होगा, जबकि उल्लंघन की स्थिति में संबंधित प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।

बालू खनन से जुड़े कारोबारियों के लिए जरूरी है कि वे घाट की सीमा, सुरक्षा व्यवस्था, धूल नियंत्रण, मासिक रिटर्न, खनन-ढुलाई के रिकॉर्ड और पौधरोपण से संबंधित नियमों की जानकारी रखें। किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से बचने के लिए संबंधित विभाग के आधिकारिक नियमों और निर्देशों की पुष्टि करना आवश्यक है।

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