Friday, August 14, 2026

बिहार की शराबबंदी नीति पर चिराग पासवान ने उठाए सवाल, बोले- 10 साल बाद समीक्षा जरूरी.

Share

पटना, 14 अगस्त 2026: बिहार में शराबबंदी कानून को लागू हुए करीब एक दशक पूरा होने के बीच केंद्रीय मंत्री और लोजपा (रामविलास) अध्यक्ष चिराग पासवान ने इसकी समीक्षा की जरूरत बताई है। उन्होंने कहा कि कानून की समीक्षा का उद्देश्य शराबबंदी को कमजोर करना नहीं, बल्कि व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना होना चाहिए।

चिराग पासवान के मुताबिक, शराबबंदी लागू करने के पीछे जो उद्देश्य तय किए गए थे, उनका मूल्यांकन अब जरूरी है। उन्होंने जहरीली शराब के मामलों और दूसरे राज्यों से बिहार में शराब पहुंचने की शिकायतों को लेकर भी चिंता जताई।

कानून के असर का होना चाहिए आकलन

चिराग पासवान ने कहा कि उनकी पार्टी ने शराबबंदी कानून का उस समय समर्थन किया था, जब वह विपक्ष में थी। हालांकि, करीब दस साल बाद यह देखना जरूरी है कि कानून से अपेक्षित सामाजिक बदलाव कितने हुए और किन क्षेत्रों में सुधार की आवश्यकता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि समीक्षा का अर्थ कानून को समाप्त करना या कमजोर करना नहीं है। इसके बजाय कानून की कमियों की पहचान कर उसे अधिक प्रभावी बनाने के उपाय किए जाने चाहिए।

जागरूकता को बताया अहम

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केवल कानूनी प्रावधानों के जरिए शराबबंदी को पूरी तरह सफल नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए समाज में लगातार जागरूकता अभियान चलाने और लोगों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत है।

उन्होंने जहरीली शराब के निर्माण और पड़ोसी राज्यों से शराब की कथित आपूर्ति को भी गंभीर चुनौती बताया। उनके अनुसार, इन समस्याओं से निपटने के लिए कानून के साथ-साथ प्रशासनिक व्यवस्था को भी मजबूत करना होगा।

सहयोगी दलों से चर्चा की अपील

चिराग पासवान ने सुझाव दिया कि शराबबंदी कानून के लगभग दस वर्ष पूरे होने पर सरकार को सहयोगी दलों के साथ चर्चा करनी चाहिए। इस दौरान कानून के क्रियान्वयन, उपलब्धियों और व्यावहारिक चुनौतियों का मूल्यांकन कर आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी समीक्षा का अंतिम लक्ष्य शराबबंदी की मूल भावना को बनाए रखते हुए व्यवस्था को ज्यादा कारगर बनाना होना चाहिए।

Read more

Local News