Friday, August 21, 2026

बिहार की 19 नदियों से हटेगी गाद, सर्वे के बाद होगी नीलामी; बाढ़ नियंत्रण और राजस्व बढ़ाने की तैयारी.

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पटना। बिहार में नदियों की तलहटी में लंबे समय से जमा गाद को हटाने के लिए सरकार नई योजना पर काम कर रही है। खान एवं भूतत्व विभाग मानसून समाप्त होने के बाद राज्य की 19 प्रमुख नदियों का वैज्ञानिक सर्वे कराने की तैयारी में है। सर्वे के जरिए यह पता लगाया जाएगा कि किन हिस्सों में कितनी गाद जमा है और उसमें से कितनी सामग्री को सुरक्षित तरीके से निकाला जा सकता है।

सरकार की योजना में नदी की सफाई के साथ-साथ निकाली जाने वाली उपयोगी मिट्टी और बालू के इस्तेमाल से राजस्व जुटाने का भी प्रावधान है।

सर्वे के बाद बनेगी जिला सर्वे रिपोर्ट

नदियों से गाद हटाने की प्रक्रिया सीधे शुरू नहीं की जाएगी। पहले विशेषज्ञों की मदद से नदी के अलग-अलग हिस्सों का सर्वे कराया जाएगा। इसमें गाद की मात्रा, उसकी प्रकृति और उसे निकालने की संभावनाओं का आकलन किया जाएगा।

सर्वे के आंकड़ों के आधार पर संबंधित जिलों में District Survey Report (DSR) तैयार की जाएगी। रिपोर्ट को निर्धारित प्रक्रिया के तहत मंजूरी मिलने के बाद ही गाद और उपयोगी खनिज सामग्री को निकालने की अगली प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

नीलामी के जरिए सरकार जुटाएगी राजस्व

सर्वे और रिपोर्ट की मंजूरी के बाद नदी से निकाली जा सकने वाली उपयोगी मिट्टी तथा बालू की नीलामी कराई जा सकती है। इसके लिए जिला प्रशासन की भूमिका अहम होगी और प्रक्रिया संबंधित जिला समाहर्ता के माध्यम से आगे बढ़ाई जाएगी।

सरकार को उम्मीद है कि इस व्यवस्था से नदी प्रबंधन के साथ अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त किया जा सकेगा।

इन 19 नदियों पर रहेगा फोकस

प्रारंभिक चरण में जिन प्रमुख नदियों को योजना में शामिल किया गया है, उनमें गंगा, कोसी, गंडक, बागमती, बूढ़ी गंडक, कमला-बलान, महानंदा, सिकरहना, बलान, लालबकिया, घोघा, पंचाने, सकरी, बाया, नून, कदाने, मसान, परमान और सुरसर शामिल हैं।

वैज्ञानिक सर्वे के बाद यह निर्धारित किया जाएगा कि प्रत्येक नदी के किस हिस्से में गाद की समस्या अधिक है और वहां से कितनी मात्रा में सामग्री हटाई जा सकती है।

निर्माण कार्यों में हो सकता है इस्तेमाल

नदी से निकलने वाली उपयुक्त मिट्टी और बालू का इस्तेमाल जरूरत के मुताबिक सड़क निर्माण, तटबंध, भराई तथा अन्य आधारभूत परियोजनाओं में किया जा सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर निर्माण सामग्री की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।

हालांकि, नदी से सामग्री निकालने का काम वैज्ञानिक आकलन और पर्यावरणीय तथा प्रशासनिक नियमों के अनुरूप ही किया जाना जरूरी होगा।

बूढ़ी गंडक में गाद का मुद्दा

समस्तीपुर क्षेत्र में बूढ़ी गंडक नदी के कुछ हिस्सों में गाद जमा होने की समस्या दिखाई देती है। नदी के बीच और किनारों पर कई स्थानों पर गाद के ऊंचे हिस्से बन गए हैं, जिन पर वनस्पति भी उग आती है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अत्यधिक गाद जमा होने से नदी की प्रभावी गहराई और पानी के प्रवाह पर असर पड़ सकता है। इसका असर भारी बारिश के दौरान जलनिकासी और बाढ़ की स्थिति पर भी पड़ सकता है।

जिला स्तर पर संबंधित विभागों के बीच समन्वय बनाकर गाद की स्थिति का आकलन करने और आगे की कार्रवाई की योजना तैयार करने की बात कही गई है।

बाढ़ नियंत्रण के साथ आर्थिक लाभ की उम्मीद

बिहार में नदियों में गाद जमा होना लंबे समय से जल प्रबंधन की चुनौती रहा है। सरकार की प्रस्तावित योजना का उद्देश्य नदी की तलहटी से उपयुक्त मात्रा में गाद हटाकर जल प्रवाह और जलधारण क्षमता को बेहतर करना है।

अगर योजना वैज्ञानिक तरीके से लागू होती है, तो इससे कुछ संवेदनशील इलाकों में जलभराव और बाढ़ के प्रभाव को कम करने में मदद मिल सकती है। दूसरी ओर, उपयोगी सामग्री की नीलामी से सरकारी राजस्व भी प्राप्त होगा।

फिलहाल योजना की शुरुआत चिन्हित 19 नदियों से किए जाने की तैयारी है। सर्वे के परिणामों और अनुभव के आधार पर भविष्य में इसे अन्य नदियों तक भी विस्तार दिया जा सकता है।

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