Thursday, March 26, 2026

बिनोद बिहारी महतो की पुण्यतिथि पर आयोजित गूंज महोत्सव का समापन हो गया.

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रांची: झारखंड आंदोलन के प्रणेता बिनोद बिहारी महतो की पुण्य स्मृति को समर्पित तीन दिवसीय गूंज सेवा महोत्सव का भव्य समापन पंच परगना के केंद्र सोनाहातू में हुआ. रांगाडीह टांड़ मैदान में आयोजित समापन समारोह में राज्यपाल संतोष गंगवार, गूंज परिवार के संरक्षक सुदेश कुमार महतो और केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया. इससे पूर्व रंगाडीह मोड़ पर बिनोद बाबू की 9 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का लोकार्पण किया गया.

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल संतोष गंगवार ने कहा कि गूंज महोत्सव झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अग्रणी प्रतीक बनकर उभरा है. यह विविधता में एकता का सशक्त उदाहरण है. उन्होंने कहा कि बिनोद बाबू का संघर्ष, सामाजिक चेतना और पढ़ो और लड़ो का संदेश आने वाली पीढ़ियों को दिशा देता रहेगा. राज्यपाल ने छऊ कलाकारों और स्कूली छात्राओं की प्रस्तुतियों की सराहना करते हुए गूंज परिवार के प्रयासों की प्रशंसा की

नई ऊर्जा और सामाजिक समरसता का मंच:- संजय सेठ

केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि गूंज महोत्सव संस्कृति और सामाजिक विषयों को मंच देने के साथ युवाओं में नई ऊर्जा का संचार करता है. उन्होंने कहा कि बीते तीन दशकों से यह आयोजन समाज को एक सूत्र में बांधने का कार्य कर रहा है.

गूंज हमारे लिए उत्सव नहीं, दायित्व है:- सुदेश महतो

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुदेश कुमार महतो ने स्वागत भाषण में कहा कि राज्यपाल का परगना आना क्षेत्रवासियों के लिए उत्साह का विषय है. उन्होंने कहा कि गूंज महोत्सव हमारे लिए केवल उत्सव नहीं बल्कि सेवा, सम्मान और सांस्कृतिक समागम का दायित्व है. यह सामूहिक शक्ति का प्रतीक है. मौके पर सुदेश महतो ने राज्यपाल समेत सभी अतिथियों का शॉल, मोमेंटो और गुलदस्ते से स्वागत किया.

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500 नगाड़ों की गूंज, छऊ–पाइका नृत्य ने बांधा समां

राज्यपाल के आगमन पर 500 नगाड़ा वादकों और पाइका नृत्य से भव्य स्वागत किया गया. सैकड़ों कलाकारों ने एक साथ छऊ नृत्य प्रस्तुत कर लोक-संस्कृति की अद्भुत छटा बिखेरी. देर रात तक बॉलीवुड और स्थानीय कलाकारों की प्रस्तुतियां चलती रहीं.

शहीदों, खिलाड़ियों, किसानों और समाजसेवियों का सम्मान

समारोह में पहलगाम आतंकी हमले में शहीद मनीष मिश्रा के माता-पिता, नक्सली हमलों में शहीद राहे प्रखंड के सदानंद महतो, सुरेंद्र स्वांसी, घासीराम महतो, नीलमोहन महतो और खंजन महतो के परिजन, स्वतंत्रता सेनानी बुली महतो के वंशज को सम्मानित किया गया.

इसके अलावा लॉन बॉल, आर्चरी, बुशु, फुटबॉल के राष्ट्रीय खिलाड़ियों, विधानसभा के खेल कोचों, जल संरक्षण में राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त झारखंड बालिका विद्यालय, राहे, तथा मारदू गांव की सोनिया कुमारी (जिन्होंने सूझबूझ से बाघ को घर में बंद किया) को सम्मान मिला.

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सेवा के ठोस कार्य- स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार

स्वास्थ्य जांच शिविर में 98 लोगों की जांच व दवा वितरण, नेत्र जांच में 75 लोगों की जांच, 20 मोतियाबिंद मरीजों का महावीर आई हॉस्पिटल, रांची में निःशुल्क ऑपरेशन, कृषि प्रदर्शनी में उत्कृष्ट किसानों का सम्मान, अनुदीप फाउंडेशन के रोजगार मेले में 80 युवाओं की पहचान और 3 को तत्काल नियुक्ति पत्र, बुशु खिलाड़ियों को खेल किट और एक एम्बुलेंस जनता को समर्पित की गई.

तीन दिन, तीन केंद्र- सेवा से संस्कृति तक

18 दिसंबर को सिल्ली में उद्घाटन, 19 दिसंबर को राहे–जोन्हा में स्वास्थ्य व नेत्र जांच और कंबल वितरण और 20 दिसंबर को सोनाहातू में भव्य समापन. तीनों दिनों में गूंज महोत्सव ने सेवा, सम्मान और संस्कृति का समग्र संदेश दिया.

जनप्रतिनिधियों की व्यापक सहभागिता

कार्यक्रम में सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी, राज्यसभा सांसद दीपक प्रकाश, पूर्व सांसद रामटहल चौधरी, पूर्व मंत्री रामचंद्र सहिस, पद्मश्री मधु मंसूरी, जिप अध्यक्ष निर्मला भगत, पूर्व विधायक रामकुमार पाहन, लंबोदर महतो, डोमन सिंह मुंडा, डॉ. देवशरण भगत, प्रवीण प्रभाकर, वीणा चौधरी सहित बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, पंचायत प्रतिनिधि और स्वयंसेवक उपस्थित रहे. विधि-व्यवस्था में 300 से अधिक कार्यकर्ता तैनात थे.

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