Friday, October 23, 2026

बंद कोयला खदानों के बदले इस्तेमाल पर जोर, कृत्रिम झील और भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन का सुझाव.

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धनबाद | 23 अक्टूबर 2026 | BHARATSUPERFASTNEWS

झारखंड के धनबाद कोयलांचल में कोयला खनन से जुड़ी पर्यावरणीय चुनौतियों और वायु प्रदूषण से निपटने के लिए बंद खदानों के वैकल्पिक उपयोग पर जोर दिया गया है। शुक्रवार को भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी-आईएसएम), धनबाद में आयोजित क्लीन एयर संवाद 2026 में विशेषज्ञों ने बंद भूमिगत खदानों के पानी से भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन और गहरी खुली खदानों को कृत्रिम झीलों में बदलने जैसे विकल्प सुझाए। इन उपायों को पर्यावरण संरक्षण के साथ रोजगार और आर्थिक गतिविधियों के नए अवसरों से जोड़कर देखा गया।

कार्यक्रम में धनबाद के उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि कोयला खनन के साथ स्वच्छ हवा और स्वस्थ जीवन सुनिश्चित करना भी जरूरी है। उन्होंने शोधकर्ताओं और तकनीकी संस्थानों से ऐसे समाधानों पर काम करने की अपील की, जिन्हें जमीन पर लागू किया जा सके।

आईआईटी-आईएसएम में क्लीन एयर संवाद 2026 का आयोजन

इस कार्यक्रम का आयोजन आईआईटी-आईएसएम और असर सोशल इंपैक्ट एडवाइजर्स के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। इसमें जिला प्रशासन, शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों, खनन क्षेत्र और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।

संवाद के दौरान खनन प्रभावित इलाकों में वायु प्रदूषण, जनस्वास्थ्य, पर्यावरणीय समस्याओं और टिकाऊ आजीविका के विकल्पों पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने इस बात पर जोर दिया कि खनन क्षेत्र के विकास के साथ स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता को भी प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

बंद खदानों से ऊर्जा उत्पादन और कृत्रिम झील बनाने का सुझाव

कार्यक्रम में बंद खदानों के वैज्ञानिक पुनरुद्धार और वैकल्पिक इस्तेमाल की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने दो प्रमुख विकल्प सामने रखे:

  • भू-तापीय ऊर्जा उत्पादन: बंद भूमिगत खदानों में मौजूद पानी और भूमिगत ताप का उपयोग करके ऊर्जा उत्पादन की संभावनाओं का अध्ययन किया जा सकता है।
  • कृत्रिम झीलों का निर्माण: गहरी खुली खदानों को वैज्ञानिक आकलन और सुरक्षा उपायों के बाद जलाशय या कृत्रिम झील के रूप में विकसित करने की संभावना पर विचार किया जा सकता है।

इन सुझावों का उद्देश्य बंद खदानों का उपयोगी पुनर्विकास करना और खनन के बाद भी क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों के अवसर तलाशना है। हालांकि, किसी भी परियोजना को लागू करने से पहले तकनीकी व्यवहार्यता, जल गुणवत्ता, भूमि की स्थिरता और पर्यावरणीय प्रभावों का आकलन जरूरी होगा।

रिपोर्ट में खनन प्रभावित क्षेत्रों की समस्याएं उजागर

कार्यक्रम के दौरान टुवर्ड्स सस्टेनेबल माइनिंग एंड हेल्थियर लाइव्स इन धनबाद रिपोर्ट का विमोचन किया गया। रिपोर्ट में खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों के अनुभवों, वायु प्रदूषण से जुड़ी चिंताओं, स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों और स्थानीय विकास की प्राथमिकताओं को रेखांकित किया गया है।

उपायुक्त आदित्य रंजन ने कहा कि धनबाद में कोयला खदानों और घनी आबादी वाले इलाकों की निकटता के कारण वायु प्रदूषण एक गंभीर चुनौती है। उन्होंने यूरोप के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बंद खदानों के वैज्ञानिक पुनरुद्धार और वैकल्पिक उपयोग की संभावनाओं पर काम करने की जरूरत बताई।

ओबी डंप की धूल और काली राख पर नियंत्रण की जरूरत

संवाद में खनन क्षेत्रों से उड़ने वाली धूल और काली राख को नियंत्रित करने के उपायों पर भी चर्चा हुई। उपायुक्त ने ओवरबर्डन (ओबी) डंप से निकलने वाली धूल को कम करने और प्लास्टिक कचरे का उपयोग कर सड़क निर्माण जैसे विकल्पों पर विचार करने का सुझाव दिया।

विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे उपायों की उपयोगिता का आकलन वैज्ञानिक परीक्षण और पर्यावरणीय मानकों के आधार पर किया जाना चाहिए, ताकि प्रदूषण नियंत्रण के साथ मानव स्वास्थ्य की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।

खनन प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य और रोजगार पर जोर

कार्यक्रम में जमीन धंसने, वायु एवं जल प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को देखते हुए कोयले से इतर रोजगार के अवसर विकसित करने की जरूरत पर भी बल दिया गया।

इसके साथ ही स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा और शहरी सुविधाओं में सुधार तथा पैदल चलने और साइकिल चलाने के अनुकूल बुनियादी ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई। उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के जीवन स्तर को बेहतर बनाना और स्थानीय विकास को अधिक टिकाऊ बनाना है।

तकनीकी सत्र में पर्यावरण अनुपालन पर चर्चा

कार्यक्रम के दौरान खनन प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने और पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान पर एक तकनीकी सत्र आयोजित किया गया। इसका संचालन शशिधर झा ने किया।

सत्र में पर्यावरण समिति के प्रतिनिधि भोलानाथ राम, हृदय रोग विशेषज्ञ एवं पूर्व उपाधीक्षक डॉ. सुनील सिन्हा और ज्ञान विज्ञान समिति के रवि सिंह ने पर्यावरणीय नियमों के अनुपालन, धूल नियंत्रण और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों पर विचार रखे।

कुल मिलाकर, क्लीन एयर संवाद 2026 में बंद खदानों के वैकल्पिक उपयोग, प्रदूषण नियंत्रण और खनन प्रभावित आबादी के स्वास्थ्य को लेकर कई सुझाव सामने आए। अब इन प्रस्तावों को व्यवहार में लागू करने के लिए तकनीकी अध्ययन, प्रशासनिक योजना और संबंधित संस्थानों के समन्वय की जरूरत होगी।

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