नई दिल्ली: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में घोषित कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज को लेकर असंतोष सामने आ रहा है. इस पैकेज से केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) और सेंट्रल ऑटोनोमस बॉडीज के कर्मचारियों को बाहर रखे जाने पर ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन ने कड़ी आपत्ति जताई है. फेडरेशन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र लिखकर मांग की है कि इस सुविधा का दायरा बढ़ाते हुए दिल्ली सहित सभी केंद्र शासित प्रदेशों और केंद्रीय स्वायत्त संस्थाओं के कर्मचारियों को भी इसमें शामिल किया जाए.
क्या है कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज
16 जनवरी को केंद्र सरकार ने केंद्रीय कर्मचारियों के लिए कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज की घोषणा की थी. इस योजना के तहत एक ही सैलरी अकाउंट के माध्यम से बैंकिंग, बीमा, लोन और कार्ड जैसी कई सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी हैं. सरकार का उद्देश्य कर्मचारियों की वित्तीय जरूरतों को सरल और सुरक्षित बनाना है. इसे आठवें वेतन आयोग के लागू होने से पहले कर्मचारियों के लिए एक अहम वेलफेयर कदम माना जा रहा है.
किन कर्मचारियों को नहीं मिला लाभ
फेडरेशन का कहना है कि यह पैकेज फिलहाल केवल केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों तक सीमित रखा गया है. इसके चलते केंद्र शासित प्रदेशों और सेंट्रल ऑटोनोमस बॉडीज में कार्यरत कर्मचारी इससे वंचित रह गए हैं. फेडरेशन के अनुसार देशभर में लगभग 5000 सेंट्रल ऑटोनोमस बॉडीज हैं, जिनमें करीब 2.5 लाख कर्मचारी कार्यरत हैं. ये सभी कर्मचारी केंद्र सरकार के नियमों और दिशा-निर्देशों के तहत सेवाएं देते हैं, इसके बावजूद उन्हें इस सुविधा से बाहर रखा गया है.
फेडरेशन ने क्यों जताई आपत्ति
ऑल इंडिया एनपीएस इंप्लॉई फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल ने पत्र में कहा है कि कंपोजिट सैलरी अकाउंट पैकेज कर्मचारियों की वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करता है. ऐसे में इसे सीमित दायरे में लागू करना कर्मचारियों के साथ भेदभाव के समान है. उन्होंने विशेष रूप से दिल्ली सरकार (जीएनसीटीडी) और अन्य केंद्र शासित प्रदेशों के कर्मचारियों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये कर्मचारी व्यवहारिक रूप से केंद्र सरकार के अधीन काम करते हैं.
समानता और न्याय की मांग
फेडरेशन ने अपने पत्र में प्रधानमंत्री के ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विजन का भी हवाला दिया है. संगठन का कहना है कि जब सभी कर्मचारी एक ही ढांचे और नियमों के तहत काम कर रहे हैं, तो सुविधाओं में भी समानता होनी चाहिए. वित्तीय सुरक्षा और सामाजिक न्याय को ध्यान में रखते हुए सभी पात्र कर्मचारियों को इस पैकेज का लाभ मिलना चाहिए.
सरकार से जल्द निर्णय की उम्मीद
फेडरेशन को उम्मीद है कि वित्त मंत्रालय कर्मचारियों की भावनाओं और जरूरतों को समझते हुए इस मांग पर जल्द सकारात्मक निर्णय लेगा. यदि ऐसा होता है तो इससे लाखों कर्मचारियों को न केवल वित्तीय राहत मिलेगी, बल्कि सरकार के कल्याणकारी दृष्टिकोण को भी मजबूती मिलेगी.


