नई दिल्ली: वैश्विक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बावजूद भारत के विदेशी व्यापार के मोर्चे पर राहत भरी खबर आई है. सोमवार को वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2026 में भारत का वस्तु व्यापार घाटा कम होकर 27.1 अरब डॉलर पर आ गया है. पिछले महीने यानी जनवरी में यह घाटा 34.68 अरब डॉलर के उच्च स्तर पर था.
निर्यात और आयात की स्थिति
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, फरवरी महीने में भारत का वस्तु निर्यात मामूली बढ़कर 36.61 अरब डॉलर रहा, जो जनवरी में 36.56 अरब डॉलर था. वहीं, आयात में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है. जनवरी के 71.24 अरब डॉलर के मुकाबले फरवरी में आयात घटकर 63.71 अरब डॉलर रह गया. वित्त वर्ष 2025-26 की अप्रैल-फरवरी अवधि के दौरान कुल निर्यात 402.93 अरब डॉलर दर्ज किया गया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि (395.66 अरब डॉलर) की तुलना में 1.84 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है.
हॉर्मुज जलडमरूमध्य का संकट और भारत पर असर
यह आंकड़े ऐसे समय में आए हैं जब 28 फरवरी से अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच युद्ध छिड़ने से मध्य पूर्व में तनाव चरम पर है. इस युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) अवरुद्ध हो गया है, जहाँ से दुनिया का 20 प्रतिशत तेल और गैस निर्यात होता है. इस मार्ग के बंद होने से खाड़ी देशों को होने वाले भारत के चावल निर्यात पर सीधा असर पड़ा है.
ऊर्जा सुरक्षा के लिए मजबूत तैयारी
अतीत में भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का लगभग 50 प्रतिशत हिस्सा हॉर्मुज जलडमरूमध्य के माध्यम से आयात करता था. हालांकि, सरकार ने अब अपनी रणनीति बदल दी है. भारत अब रूस सहित लगभग 40 विभिन्न देशों से कच्चा तेल खरीद रहा है. एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि भारत के पास पर्याप्त रणनीतिक तेल भंडार मौजूद हैं, जिससे देश किसी भी वैश्विक ऊर्जा संकट का सामना करने में सक्षम है. इसी लचीलेपन के कारण ईरान युद्ध के बावजूद भारत में अब तक ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा नहीं हुई है.
भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा
शिपिंग और बंदरगाह मंत्रालय ने पुष्टि की है कि खाड़ी क्षेत्र में सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं. भारतीय अधिकारियों के सीधे हस्तक्षेप के बाद, ‘जग लाडकी’ नामक जहाज मुर्बन कच्चे तेल के साथ सुरक्षित रवाना हो चुका है. इसके अलावा, एलपीजी लेकर आ रहे दो जहाज ‘शिवालिक’ और ‘नंदा देवी’ भी हॉर्मुज जलडमरूमध्य को पार कर चुके हैं और सोमवार व मंगलवार तक क्रमशः मुंद्रा और कांडला बंदरगाह पहुँच जाएंगे.


