पेंटागन ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिका अगले छह से 12 महीनों में जर्मनी से करीब 5,000 सैनिक वापस बुला लेगा. यह बात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की उस धमकी को पूरा करती है, जो उन्होंने ईरान के साथ अमेरिकी युद्ध को लेकर जर्मनी के लीडर से टकराव के दौरान कही थी.
ट्रंप ने इस हफ़्ते की शुरुआत में नाटो (NATO) सहयोगी से कुछ सैनिकों को वापस बुलाने की धमकी दी थी, जब चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा था कि ईरानी लीडरशिप अमेरिका को ‘बेइज्जत’ कर रही है और युद्ध में वाशिंगटन की स्ट्रैटेजी की कमी की आलोचना की थी.
पेंटागन के स्पोक्सपर्सन सीन पार्नेल ने एक बयान में कहा कि यह फैसला यूरोप में डिपार्टमेंट की फ़ोर्स की स्थिति की पूरी समीक्षा के बाद लिया गया है और यह जमीन पर थिएटर की जरूरतों और हालात को ध्यान में रखते हुए लिया गया है.’
जर्मनी में कई अमेरिकी मिलिट्री फ़ैसिलिटी हैं. इनमें उसके यूरोपियन और अफ्रीका कमांड का हेडक्वार्टर, रैमस्टीन एयर बेस और लैंडस्टहल में एक मेडिकल सेंटर शामिल है. जहां अफगानिस्तान और इराक में युद्धों में घायलों का इलाज किया गया था. अमेरिकी न्यूक्लियर मिसाइलें भी वहां तैनात हैं. जर्मनी छोड़ने वाले सैनिकों की संख्या वहाँ तैनात 36,000 अमेरिकी सर्विस मेंबर्स का 14 फीसदी होगी.
सेना की वापसी की खबर पर कांग्रेस में डेमोक्रेट्स के साथ-साथ वाशिंगटन के एक कट्टर थिंक टैंक ने भी तीखा विरोध किया. उन्होंने कहा कि इस कदम से रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को फायदा होगा और अमेरिकी सुरक्षा हित कमजोर होंगे. रोड आइलैंड के सीनेटर जैक रीड, जो सीनेट आर्म्ड सर्विसेज कमेटी में रैंकिंग डेमोक्रेट हैं, ने कहा कि सेना की वापसी यह बताती है कि हमारे सहयोगियों के प्रति अमेरिकी कमिटमेंट राष्ट्रपति के मूड पर निर्भर करते हैं.’
रीड ने कहा, ‘राष्ट्रपति को तुरंत यह लापरवाही भरा काम बंद कर देना चाहिए, इससे पहले कि वह हमारे गठबंधनों और लंबे समय की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए ऐसे नतीजे पैदा करें जिन्हें बदला न जा सके.’ फाउंडेशन फॉर डिफेंस ऑफ डेमोक्रेसीज के एक स्कॉलर ब्रैडली बोमन ने कहा कि जर्मनी और यूरोप में दूसरी जगहों पर अमेरिकी सेना की मौजूदगी न केवल क्रेमलिन के और हमले के खिलाफ रोकथाम को मजबूत करती है, बल्कि भूमध्य सागर, मध्य पूर्व और अफ्रीका में अमेरिकी सैन्य शक्ति को बल मिलता है.
ट्रंप ने शुक्रवार को फ्लोरिडा के ओकाला में अपने इकोनॉमिक एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए एक रैली के बाद एयर फोर्स वन में सवार होते समय वापसी के बारे में रिपोर्टरों के सवालों को नजरअंदाज कर दिया. ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में भी ऐसी ही धमकी दी थी, जिसमें कहा गया था कि वह जर्मनी में तैनात लगभग 34,500 अमेरिकी सैनिकों में से लगभग 9,500 को वापस बुला लेंगे, लेकिन उन्होंने यह प्रोसेस शुरू नहीं किया और डेमोक्रेटिक प्रेसिडेंट जो बाइडेन ने 2021 में ऑफिस संभालने के तुरंत बाद ही सैनिकों की वापसी की योजना को औपचारिक रूप से रोक दिया.
अमेरिकी नेता कई सालों से जर्मनी में अमेरिकी मिलिट्री की मौजूदगी कम करने के बारे में सोच रहे हैं. ईरान पर अमेरिकी-इजरायल के हमलों नाटों के रवैये पर नाराजगी जताते हुए ट्रंप प्रशासन ने ये कदम उठाए. ट्रंप ने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि अमेरिका जर्मनी में संभावित सैनिकों की कटौती का रिव्यू कर रहा है, और जल्द ही इस पर फैसला किया जाएगा.
गुरुवार को वह अभी भी मर्ज के बारे में सोच रहे थे, उन्होंने पोस्ट किया कि जर्मन लीडर को ईरान की चिंता करने के बजाय रूस-यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने और अपने टूटे हुए देश को ठीक करने पर ज्यादा समय देना चाहिए. नाटो (NATO) में अमेरिकी सहयोगी ट्रंप के ऑफिस संभालने के बाद से अमेरिका सैनिकों की वापसी के लिए तैयार है और वॉशिंगटन ने चेतावनी दी है कि भविष्य में यूरोप को यूक्रेन सहित अपनी सुरक्षा का ध्यान खुद रखना होगा.
ऑपरेशन, एक्सरसाइज और सैनिकों के रोटेशन के आधार पर आमतौर पर यूरोप में लगभग 80,000-100,000 अमेरिका जवान तैनात रहते हैं. नाटो (NATO) सहयोगी एक साल से ज़्यादा समय से उम्मीद कर रहे हैं कि फरवरी 2022 में रूस द्वारा यूक्रेन पर पूरी तरह से युद्ध शुरू करने के बाद तैनात अमेरिकी सैनिक सबसे पहले निकलेंगे.
लंदन में रॉयल यूनाइटेड सर्विसेज इंस्टीट्यूट, या आरयूएसआई (RUSI) में यूरोपियन सिक्योरिटी के एक्सपर्ट एड अर्नोल्ड ने कहा कि यूरोप, जर्मनी से मिडिल ईस्ट में पैट्रियट मिसाइल सिस्टम और गोला-बारूद की अमेरिकी रीडिप्लॉयमेंट जैसे मुद्दों को लेकर ज़्यादा चिंतित है


