Tuesday, March 24, 2026

पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने अजित महतो की मौत को लेकर न्यायिक जांक की मांग की है.

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पूर्व सीएम अर्जुन मुंडा ने पुलिस की पिटाई से हुई अजित महतो की मौत को लेकर न्यायिक जांक की मांग की है. इसको लेकर उन्होंने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष को पत्र लिखा है. 

पत्र में कहा है कि जमशेदपुर के मानगो, गोकुल नगर बस्ती निवासी अजीत महतो की 30 दिसंबर 2025 को पुलिस अभिरक्षा में हुई मृत्यु हो गई. यह घटना प्रथम दृष्टया संविधान के अनुच्छेद 21 के अंतर्गत प्रदत्त जीवन एवं गरिमा के अधिकार तथा स्थापित मानवाधिकार मानकों के गंभीर उल्लंघन का विषय प्रतीत होती है.
 

यह घटना अत्यंत चिंताजनक

पत्र में आगे लिखा है कि यह घटना अत्यंत चिंताजनक है. बिना किसी स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच के, मात्र एक अप्राकृतिक मृत्यु प्रकरण दर्ज कर मृतक के परिजनों को सादे कागज पर जबरन हस्ताक्षर करवाकर 200000 रुपए की राशि थमा दी गई. जिसके वैधानिक आधार एवं प्रक्रिया का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया. इससे प्रकरण की पारदर्शिता एवं निष्पक्षता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है.
 

गिरफ्तारी के बाद परिजनों को नहीं मिलने दिया

यह भी तथ्य है कि गिरफ्तारी के पश्चात लगभग दो दिनों तक परिजनों को मृतक से मिलने की अनुमति नहीं दी गई एवं जिससे यह प्रतीत होता है कि पुलिस यातना से ही इनकी मृत्यु हुई है. इसी अवधि में मृतक की गर्भवती पत्नी ने एक नवजात कन्या को जन्म दिया.

अजीत महतो अपने परिवार के एकमात्र आजीविका अर्जक थे. परिणामस्वरूप एक परिवार गंभीर सामाजिक, आर्थिक एवं मानसिक संकट में आ गया है. पुलिस अभिरक्षा में किसी नागरिक की मृत्यु स्वयं में एक गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन है, जिसकी जांच स्वतंत्र, उच्चस्तरीय एवं न्यायिक प्रकृति की होनी अनिवार्य है.

अर्जुन मुंडा ने क्या की है मांग

•    इस प्रकरण का स्वतः संज्ञान लेते हुए स्वतंत्र एवं न्यायिक जांच सुनिश्चित की जाए.

•    दोषी पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों व अधिकारियों के विरुद्ध कठोर विधिक एवं 
विभागीय कार्रवाई की जाए.

•    मृतक के परिजनों को न्यायोचित एवं सम्मानजनक मुआवजा, पुनर्वास एवं आवश्यक सुरक्षा प्रदान की जाए.

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