नई दिल्ली : सरकार ने मंगलवार को चीन समेत भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले सभी देशों के लिए प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) नियमों को सरल बना दिया. सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि इस संबंध में 2020 के प्रेस नोट-3 में संशोधन किया गया है.
यह निर्णय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में लिया गया. हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने मंत्रिमंडल के फैसलों पर संवाददाताओं से बातचीत के दौरान इस संबंध में कोई घोषणा नहीं की.
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) ने कहा, ‘‘मंत्रिमंडल द्वारा आज ऐसी कोई घोषणा नहीं की गई.’’ डीपीआईआईटी वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय की इकाई है जो प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) से संबंधित मामलों को देखता है.
इस प्रेस नोट के तहत जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों के शेयरधारकों वाली विदेशी कंपनियों को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश करने के लिए सरकार से अनिवार्य रूप से मंजूरी लेने की जरूरत है. भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यांमा और अफगानिस्तान हैं.
भारत में अप्रैल, 2000 से दिसंबर, 2025 तक आये कुल एफडीआई इक्विटी प्रवाह में चीन की हिस्सेदारी केवल 0.32 प्रतिशत (2.51 अरब अमेरिकी डॉलर) है और वह 23वें स्थान पर है. जून, 2020 में गलवान घाटी में हुई भीषण झड़प के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आ गयी थी.
इसके बाद भारत ने टिक टॉक, वीचैट और अलीबाबा के यूसी ब्राउजर जैसे 200 से अधिक चीनी मोबाइल ऐप पर प्रतिबंध लगा दिया था.
हालांकि, भारत को चीन से बहुत कम प्रत्यक्ष विदेशी निवेश प्राप्त हुआ है, फिर भी दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में कई गुना वृद्धि हुई है. चीन, भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार बनकर उभरा है.
भारत का चीन को निर्यात 2024-25 में 14.5 प्रतिशत घटकर 14.25 अरब डॉलर रहा, जबकि 2023-24 में यह 16.66 अरब डॉलर था. हालांकि, आयात 2024-25 में 11.52 प्रतिशत बढ़कर 113.45 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2023-24 में यह 101.73 अरब डॉलर था. व्यापार घाटा 2023-24 के 85 अरब अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2024-25 में 99.2 अरब डॉलर हो गया.
भारत का चीन को निर्यात चालू वित्त वर्ष में अप्रैल-जनवरी के दौरान 38.37 प्रतिशत बढ़कर 15.88 अरब डॉलर रहा, जबकि आयात 13.82 प्रतिशत बढ़कर 108.18 अरब डॉलर हो गया. व्यापार घाटा 92.3 अरब अमेरिकी डॉलर रहा.
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने पश्चिम बंगाल और झारखंड को जोड़ने वाली रेलवे की दो ‘मल्टीट्रैकिंग’ परियोजनाओं को मंगलवार को मंजूरी दे दी. इन पर 4,474 करोड़ रुपये की कुल लागत आएगी. ये परियोजनाएं सैंथिया-पाकुड़ और संतरागाछी-खड़गपुर के बीच चौथी रेलवे लाइन से जुड़ी हैं.
प्रधानमंत्री मोदी ने ‘एक्स’ पर कहा, ‘‘ये परियोजनाएं पूर्वी भारत में रेल कनेक्टिविटी को बढ़ावा देंगी, दक्षता बढ़ाएंगी, भीड़भाड़ कम करेंगी और इन राज्यों में कनेक्टिविटी मजबूत करेंगी। वे माल ढुलाई में भी सुधार करेंगी, आर्थिक गतिविधि का समर्थन करेंगी और टिकाऊ, कम कार्बन परिवहन को आगे बढ़ाएंगी.’’
पश्चिम बंगाल और झारखंड के पांच जिलों को शामिल करने वाली दो परियोजनाएं भारतीय रेलवे के मौजूदा नेटवर्क को लगभग 192 किलोमीटर तक बढ़ाएंगी. एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि ये परियोजनाएं पीएम-गति शक्ति राष्ट्रीय मास्टर प्लान के अंतर्गत बनाई गई हैं, जिसमें एकीकृत योजना और हितधारकों के परामर्श के माध्यम से मल्टी-मोडल कनेक्टिविटी और लॉजिस्टिक दक्षता बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. ये परियोजनाएं लोगों, वस्तुओं और सेवाओं के निर्बाध आवागमन के लिए कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी.
इन परियोजनाओं के साथ देश में रेल नेटवर्क के विस्तार को रेखांकित करते हुए सरकार ने कहा है कि स्वीकृत ‘मल्टी-ट्रैकिंग’ परियोजना लगभग 5,652 गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान करेगी, जिनकी आबादी लगभग 147 लाख है.
सरकार ने कहा है कि प्रस्तावित क्षमता वृद्धि से देश भर के कई प्रमुख पर्यटन स्थलों, जैसे बोलपुर-शांतिनिकेतन, नंदिकेश्वरी मंदिर (शक्तिपीठ), तारापीठ (शक्तिपीठ), पटाचित्र ग्राम, धडिका वन, भीमबंध वन्यजीव अभयारण्य, रामेश्वर कुंड के लिए रेल संपर्क में सुधार होगा.


