चैती छठ के अंतिम दिन उषा अर्घ्य के बाद व्रती पारण करती हैं. इस दिन हल्का भोजन करने की सलाह दी जाती है, क्योंकि 36 घंटों के व्रत के बाद सीधे मसालेदार और भारी भोजन शरीर के लिए सही नहीं माना जाता है. आइए जानते हैं, इस दिन क्या खाना चाहिए.
छठ हिंदू धर्म के सबसे पवित्र और कठिन व्रतों में से एक है. साल में दो बार छठ पर्व मनाया जाता है पहला चैत्र मास में और दूसरा कार्तिक मास में. चैत्र मास में पड़ने वाले छठ को चैती छठ कहा जाता है. नहाय-खाय के साथ चार दिवसीय इस पर्व का प्रारंभ होता है और उषा अर्घ्य के साथ इसका समापन होता है. व्रती 36 घंटे के कठिन निर्जला व्रत को उषा अर्घ्य देने के बाद ही खोलते हैं, जिसे पारण कहा जाता है. पारण छठ पूजा का वह अंतिम चरण है, जहां भक्त अपनी साधना पूर्ण करते हैं. चूंकि शरीर लंबे समय तक बिना अन्न-जल के रहता है, इसलिए पारण के समय खान-पान का विशेष ध्यान रखना अनिवार्य है.
पारण का शुभ समय और विधि
25 मार्च की सुबह जब सूर्य की पहली किरणें दिखाई देंगी, तब व्रती नदी या जलाशय के जल में खड़े होकर भगवान सूर्य को दूध और जल से अर्घ्य देंगे. इसके पश्चात घाट पर ही छठी मैया का ध्यान कर प्रसाद ग्रहण किया जाता है. इसके बाद घर लौटकर विधिवत पारण की प्रक्रिया पूरी की जाती है.
पारण में क्या खाएं?
- अदरक और गुड़: पारण की शुरुआत अक्सर अदरक के एक छोटे टुकड़े और गुड़ के साथ की जाती है. यह पाचन अग्नि को धीरे-धीरे सक्रिय करता है.
- मुख्य प्रसाद: सबसे पहले पूजा का मुख्य प्रसाद ‘ठेकुआ’ और ‘कसार (चावल के लड्डू)’ ग्रहण करना चाहिए.
- सात्विक भोजन: पारण के दिन सादा और सुपाच्य भोजन करना चाहिए. पारंपरिक रूप से इस दिन चावल, चने की दाल, लौकी की सब्जी और साग समेत अन्य सब्जियां बनाई जाती हैं. इसमें सेंधा नमक का उपयोग करना उत्तम माना जाता है.
- तरल पदार्थ: 36 घंटे के निर्जला व्रत के बाद शरीर में पानी की कमी हो जाती है, इसलिए नारियल पानी, नींबू पानी या सादा जल पर्याप्त मात्रा में पीना चाहिए.
किन चीजों से बचें?
- लहसुन और प्याज: पारण के दिन भी घर में लहसुन-प्याज या तामसिक भोजन का प्रयोग वर्जित रहता है.
- भारी भोजन: व्रत खोलते ही अत्यधिक तेल-मसाले वाला या तला-भुना खाना खाने से बचें, क्योंकि इससे पेट की समस्याएं हो सकती हैं


