नई दिल्ली: विमानन क्षेत्र में काम करने वाले पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट लंबे समय तक ऊंचाई पर उड़ान भरते हैं। इसी वजह से उनके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले संभावित प्रभावों को लेकर एक नई अमेरिकी स्टडी ने ध्यान खींचा है। शोध में विमानन पेशे से जुड़े कर्मचारियों में कुछ प्रकार के रेडिएशन-संबंधी कैंसर से मृत्यु के जोखिम का अध्ययन किया गया है।
यह शोध 17 अगस्त 2026 को JAMA Internal Medicine में प्रकाशित हुआ। शोधकर्ताओं ने अमेरिका के करीब 1.27 करोड़ डेथ सर्टिफिकेट और 503 अलग-अलग व्यवसायों से जुड़े आंकड़ों का विश्लेषण किया।
पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट में क्या मिला?
अध्ययन में पाया गया कि जिन व्यवसायों का विश्लेषण किया गया, उनमें पायलट और फ्लाइट अटेंडेंट रेडिएशन से जुड़े कैंसर मृत्यु दर के मामले में शीर्ष स्थानों पर रहे। फ्लाइट अटेंडेंट पहले और पायलट दूसरे स्थान पर बताए गए।
शोध में यह भी संकेत मिला कि महिलाओं में यह मृत्यु अनुपात पुरुषों की तुलना में कुछ अधिक था। हालांकि, इन आंकड़ों का मतलब यह नहीं है कि विमान में काम करने वाले हर व्यक्ति को कैंसर होगा। अध्ययन व्यवसाय और मृत्यु के आंकड़ों के बीच संबंध को देखता है, किसी एक व्यक्ति के कैंसर का सीधा कारण निर्धारित नहीं करता।
कौन-कौन से कैंसर अध्ययन में शामिल थे?
शोधकर्ताओं ने कई तरह के कैंसर को अपने विश्लेषण में शामिल किया। इनमें ब्रेस्ट कैंसर, केंद्रीय तंत्रिका तंत्र से जुड़े कैंसर, मल्टीपल मायलोमा, कुछ प्रकार के ल्यूकेमिया, लिम्फोमा, थायरॉयड कैंसर, प्रोस्टेट कैंसर और त्वचा कैंसर के कुछ प्रकार शामिल थे।
फेफड़ों के कैंसर को इस विश्लेषण में शामिल नहीं किया गया, क्योंकि शोधकर्ता धूम्रपान जैसे अन्य कारकों के प्रभाव को अलग रखना चाहते थे।
ज्यादा ऊंचाई पर रेडिएशन का संपर्क क्यों बढ़ता है?
पृथ्वी का वायुमंडल और चुंबकीय क्षेत्र अंतरिक्ष से आने वाले कॉस्मिक रेडिएशन से काफी हद तक सुरक्षा प्रदान करते हैं। लेकिन विमान जब बहुत अधिक ऊंचाई पर उड़ता है, तो वायुमंडल की यह सुरक्षा सतह की तुलना में कम हो जाती है।
इसका मतलब है कि विमान के चालक दल को जमीन पर रहने वाले लोगों की तुलना में कॉस्मिक रेडिएशन की अधिक मात्रा का सामना करना पड़ सकता है। लंबे समय तक उड़ान भरने वाले क्रू सदस्यों में यह एक्सपोजर वर्षों के दौरान जमा हो सकता है।
विशेष रूप से लंबी दूरी की उड़ानों और कुछ ध्रुवीय मार्गों पर कॉस्मिक रेडिएशन का स्तर अपेक्षाकृत अधिक हो सकता है।
सिर्फ रेडिएशन ही जिम्मेदार नहीं
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए विमानन कर्मचारियों के स्वास्थ्य का अध्ययन केवल रेडिएशन तक सीमित नहीं है। पायलट और केबिन क्रू को अनियमित शिफ्ट, रात में काम, बार-बार समय क्षेत्र बदलने और नींद के पैटर्न में बदलाव जैसी परिस्थितियों का भी सामना करना पड़ता है।
शोधकर्ताओं ने विमानन कर्मचारियों के स्वास्थ्य जोखिमों को कम करने के लिए बेहतर निगरानी, नियमित स्वास्थ्य जांच और उड़ान के कुल घंटों पर प्रभावी नजर रखने जैसे उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया है।
क्या हवाई यात्रियों को भी डरने की जरूरत है?
इस अध्ययन के आधार पर कभी-कभार विमान से यात्रा करने वाले आम यात्रियों को विशेष चिंता करने की जरूरत नहीं बताई गई है। फ्लाइट क्रू और नियमित रूप से हजारों घंटे उड़ान भरने वाले कर्मचारियों का एक्सपोजर सामान्य यात्रियों की तुलना में अलग होता है।
इसलिए साल में कुछ बार छुट्टी या काम के सिलसिले में विमान से यात्रा करने और वर्षों तक पेशे के तौर पर उड़ान भरने के जोखिम को एक जैसा नहीं माना जा सकता।
स्टडी को समझने में जरूरी सावधानी
यह अध्ययन बड़े पैमाने पर मृत्यु प्रमाणपत्रों और व्यवसाय से जुड़े आंकड़ों पर आधारित है। इसलिए इससे किसी व्यक्ति में कैंसर होने का सीधा कारण साबित नहीं होता। कैंसर के जोखिम पर उम्र, आनुवंशिकता, जीवनशैली, काम की परिस्थितियों और अन्य पर्यावरणीय कारकों का भी प्रभाव पड़ सकता है।
फिर भी, शोध के निष्कर्ष विमानन क्षेत्र में लंबे समय तक काम करने वाले कर्मचारियों के स्वास्थ्य की नियमित निगरानी और कार्यस्थल सुरक्षा पर आगे अध्ययन की जरूरत को रेखांकित करते हैं।
