Thursday, April 2, 2026

पश्चिम एशिया संकट के बीच, सरकार ने 40 पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क हटाकर उद्योगों को लागत और आपूर्ति में बड़ी राहत दी है.

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नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उत्पन्न गतिरोध के बीच, भारत सरकार ने घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को बड़ी राहत दी है. केंद्र सरकार ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण अधिसूचना जारी करते हुए 40 प्रमुख पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर सीमा शुल्क को पूर्ण रूप से माफ करने की घोषणा की है. यह निर्णय 2 अप्रैल, 2026 से प्रभावी हो गया है और 30 जून, 2026 तक लागू रहेगा.

निर्णय का मुख्य उद्देश्य
वित्त मंत्रालय द्वारा जारी बयान के अनुसार, इस पहल का प्राथमिक उद्देश्य पश्चिम एशिया (विशेषकर अमेरिका-ईरान संघर्ष) के कारण कच्चे माल की कीमतों में आई भारी उछाल से भारतीय उद्योगों को सुरक्षा प्रदान करना है. फरवरी के उत्तरार्ध से वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में लगभग 50% की वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक और इंटरमीडिएट्स पर निर्भर उद्योगों की इनपुट लागत 20-25% तक बढ़ गई है.

इन उत्पादों पर मिलेगी राहत
सरकार ने उन सभी महत्वपूर्ण रसायनों और पॉलिमर को इस सूची में शामिल किया है, जिनकी कमी से उत्पादन ठप होने का डर था:

  • प्रमुख रसायन: मेथनॉल, एनहाइड्रस अमोनिया, टोल्यूनि, स्टाइरीन, विनाइल क्लोराइड मोनोमर (VCM), एसिटिक एसिड, और फिनोल.
  • पॉलिमर और प्लास्टिक: पॉलीइथाइलीन, पॉलीप्रोपाइलीन, पॉलीस्टाइनिन, पॉलीविनाइल क्लोराइड (PVC), और PET चिप्स.
  • इंजीनियरिंग प्लास्टिक: एक्रिलोनिट्रिल-ब्यूटाडीन-स्टाइरीन (ABS) और पॉलीकार्बोनेट.
  • विशेष रसायन: एपॉक्सी रेजिन, पॉलीयूरेथेन और फॉर्मल्डेहाइड डेरिवेटिव.

प्रमुख क्षेत्रों पर प्रभाव

  • कपड़ा और परिधान: शुद्ध टेरेफ्थालिक एसिड (PTA) और मोनोइथिलीन ग्लाइकॉल (MEG) पर शुल्क छूट से सिंथेटिक फाइबर की लागत कम होगी.
  • ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रॉनिक्स: ABS और इंजीनियरिंग प्लास्टिक के आयात पर बचत से वाहनों के पुर्जों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की कीमतों में स्थिरता आएगी.
  • फार्मास्युटिकल्स: दवाओं के निर्माण में विलायक (Solvents) के रूप में उपयोग होने वाले रसायनों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी.
  • प्लास्टिक और पैकेजिंग: यह क्षेत्र सीधे तौर पर पॉलिमर और रेजिन के शुल्क-मुक्त आयात से लाभान्वित होगा.

विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम ‘कॉस्ट-पुश इन्फ्लेशन’ को नियंत्रित करने में सहायक होगा. भारत अपनी पेट्रोकेमिकल इंटरमीडिएट जरूरतों का लगभग 45% आयात करता है. ऐसे में सीमा शुल्क हटाना न केवल उद्योगों की लाभप्रदता बनाए रखने में मदद करेगा, बल्कि अंतिम उपभोक्ताओं को भी कीमतों में वृद्धि से बचाएगा.

सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह वैश्विक और भू-राजनीतिक स्थितियों पर कड़ी नजर रख रही है. यदि आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान जून के बाद भी जारी रहता है, तो इस राहत अवधि को आगे बढ़ाने पर विचार किया जा सकता है.

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