नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में तनाव और समुद्री मार्गों पर बढ़ी लॉजिस्टिक अनिश्चितता के बीच केंद्र सरकार ने भारतीय निर्यातकों के लिए दो अहम योजनाओं की अवधि बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार ने R-ELIEF योजना के दूसरे चरण को विस्तार दिया है, जबकि RoDTEP योजना को 31 दिसंबर 2026 तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है।
सरकार के मुताबिक, इन उपायों का उद्देश्य वैश्विक व्यापार में पैदा हुई मौजूदा चुनौतियों के बीच भारतीय निर्यातकों को अतिरिक्त लागत और जोखिम से राहत देना तथा निर्यात गतिविधियों को समर्थन देना है।
R-ELIEF योजना से बीमा जोखिम में राहत
R-ELIEF (Resilience and Logistics Intervention for Export Facilitation) योजना के तहत निर्धारित जोखिम वाले क्षेत्रों में निर्यात करने वाले कारोबारियों को ECGC कवर के जरिए अतिरिक्त सुरक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
इस व्यवस्था के तहत पात्र निर्यातकों को क्रेडिट रिस्क पर 95 प्रतिशत तक कवर मिल सकता है। खास बात यह है कि बढ़े हुए जोखिम के कारण आने वाली अतिरिक्त बीमा लागत का पूरा भार निर्यातकों पर नहीं डालने की व्यवस्था की गई है।
योजना का लाभ 16 मार्च 2026 या उसके बाद जारी पात्र स्टैंड-अलोन और होल टर्नओवर पॉलिसियों पर लागू होगा। इसमें FCL, LCL और रीफर कंटेनर शिपमेंट शामिल हैं।
हालांकि, ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े तेल और गैस के शिपमेंट को इस सुविधा के दायरे से बाहर रखा गया है।
RoDTEP योजना भी दिसंबर तक जारी
सरकार ने RoDTEP यानी Remission of Duties and Taxes on Exported Products योजना की अवधि भी 31 दिसंबर 2026 तक बढ़ा दी है।
इस योजना के तहत निर्यात किए जाने वाले उत्पादों पर ऐसे केंद्रीय, राज्य और स्थानीय स्तर के करों, शुल्कों और लेवी की वापसी की जाती है, जिन्हें किसी अन्य व्यवस्था के तहत रिफंड या छूट नहीं मिलती।
इसका उद्देश्य भारतीय उत्पादों की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता बनाए रखने में निर्यातकों की मदद करना है।
मौजूदा रिफंड दरों में फिलहाल बदलाव नहीं
सरकार ने स्पष्ट किया है कि 30 सितंबर तक लागू RoDTEP की मौजूदा दरें और मूल्य सीमा दिसंबर 2026 के अंत तक जारी रहेंगी। संबंधित दरें Appendix 4R और 4RE के तहत लागू हैं।
इससे निर्यात कारोबार से जुड़े लोगों को आगामी महीनों के लिए लागत और मूल्य निर्धारण की योजना बनाने में अधिक स्थिरता मिल सकती है।
किन कारोबारियों को मिलेगा फायदा?
RoDTEP विस्तार का लाभ पात्र Domestic Tariff Area (DTA) इकाइयों, Advance Authorisation धारकों, Special Economic Zone (SEZ) इकाइयों और Export Oriented Units (EOU) को मिलता रहेगा।
वहीं, R-ELIEF के तहत राहत निर्धारित जोखिम वाले क्षेत्रों में पात्र शिपमेंट और संबंधित ECGC कवर की शर्तों के अनुसार उपलब्ध होगी।
पश्चिम एशिया संकट के बीच क्यों अहम है फैसला?
पश्चिम एशिया में तनाव के कारण समुद्री परिवहन, बीमा और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी लागत में अनिश्चितता बढ़ी है। ऐसे माहौल में निर्यातकों के लिए माल को सुरक्षित और प्रतिस्पर्धी लागत पर विदेशी बाजारों तक पहुंचाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
सरकार के इन उपायों से जोखिम और कर-संबंधी लागत के कुछ हिस्से को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, वैश्विक बाजार में भारतीय निर्यात पर अंतिम प्रभाव समुद्री मार्गों, बीमा लागत, माल ढुलाई और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
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