Friday, June 12, 2026

पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव और ईरान व कश्मीर में कम उत्पादन के कारण ‘केसर’ की कीमतों में भारी उछाल आया है.

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श्रीनगरः दुनिया के सबसे महंगे मसाले, केसर की कीमत भारतीय बाजारों में तेजी से बढ़ गई है. ईरान और कश्मीर में कम उत्पादन के कारण दुनिया भर में इसकी सप्लाई घट गई है. कारोबारियों के अनुसार, पश्चिम एशिया में जारी तनाव ने भी केसर की उपलब्धता को प्रभावित किया है और इस ‘लाल सोने’ (रेड गोल्ड) की कीमतों को एक नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा दिया है.

कीमतों में यह ताजा उछाल ईरान, इजरायल और अमेरिका के बीच चल रहे संघर्ष की वजह से बढ़ी अनिश्चितता के बीच आया है. व्यापारियों का कहना है कि व्यापारिक मार्गों, लॉजिस्टिक्स और भविष्य की सप्लाई को लेकर बनी चिंताओं ने पहले से ही तंग बाजार पर दबाव और बढ़ा दिया है.

Saffron Price Hike India

पाम्पोर में ‘सैफ्रन ग्रोअर्स एसोसिएशन’ (केसर उत्पादक संघ) के अध्यक्ष अब्दुल मजीद ने कहा कि स्थानीय स्तर पर कम उत्पादन और ईरान से होने वाली सप्लाई को प्रभावित करने वाली अस्थिरता के दोहरे असर ने कीमतों को काफी प्रभावित किया है. उन्होंने बताया कि पिछले साल कश्मीर में केसर का उत्पादन सामान्य स्तर के मुकाबले काफी गिर गया था, जबकि ईरान के घटनाक्रमों से जुड़ी रुकावटों ने बाजार में इसकी उपलब्धता को और कम कर दिया.

ईरान दुनिया के लगभग 90 प्रतिशत केसर का उत्पादन करता है. इस देश का अधिकांश उत्पादन उत्तर-पूर्वी खुरासान क्षेत्र से आता है, जिसे अक्सर केसर की खेती का वैश्विक केंद्र कहा जाता है. व्यापारियों का कहना है कि इस क्षेत्र में बनी अनिश्चितता के कारण खरीद की लागत बढ़ गई है. उत्पादकों और आयातकों के अनुसार, जो ईरानी केसर आमतौर पर 150 से 160 रुपये प्रति ग्राम के बीच बिकता था, वह अब लगभग 190 से 200 रुपये प्रति ग्राम के आसपास बेचा जा रहा है.

इरान-इजरायल संघर्ष में हाल के घटनाक्रमों ने कमोडिटी (वस्तु) व्यापारियों को तनाव में रखा है. वाशिंगटन और तेहरान से जुड़े राजनयिक प्रयास जारी हैं. लेकिन सैन्य तनाव अभी भी ऊंचा बना हुआ है. उत्पादकों और व्यापारियों का कहना है कि खाड़ी क्षेत्र में व्यापारिक गलियारों, विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास रुकावट आने की आशंका ने केसर सहित कई वस्तुओं की कीमतों में ‘जोखिम प्रीमियम’ जोड़ दिया है.

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हालांकि केसर की खेपों पर अभी तक कोई सीधा असर नहीं पड़ा है, लेकिन व्यापारियों का कहना है कि परिवहन, बीमा और भुगतान चैनलों को लेकर बनी अनिश्चितता ने आयातकों को सतर्क कर दिया है, जिससे कीमतों में उतार-चढ़ाव बढ़ गया है.

भारत में, घरेलू केसर उत्पादन का 90 प्रतिशत से अधिक हिस्सा कश्मीर से आता है और इसकी खेती मुख्य रूप से पुलवामा जिले के पाम्पोर के केसर खेतों में केंद्रित है. कश्मीर के ‘लाल सोने’ के रूप में जाने जाने वाले इस फसल को खराब मौसम, कम बारिश, बदलते जलवायु पैटर्न और घटती उत्पादकता के कारण बार-बार झटके लगे हैं.

सरकारी आंकड़े हाल के वर्षों में उत्पादन में होने वाले उतार-चढ़ाव को दर्शाते हैं. जम्मू-कश्मीर में केसर का उत्पादन 2020-21 में 17.33 टन था, जो 2021-22 में घटकर 14.87 टन और 2022-23 में 14.94 टन रह गया. इसके बाद 2023-24 में उत्पादन तेजी से बढ़कर 23.53 टन पर पहुंच गया, लेकिन 2024-25 में यह फिर से गिरकर 19.58 टन रह गया.

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उत्पादकों का कहना है कि मौसम से जुड़ी रुकावटें केसर के फूलों के खिलने और उनकी पैदावार को लगातार प्रभावित कर रही हैं. मजीद ने कहा कि किसान मौसम की अनिश्चित परिस्थितियों से जूझ रहे हैं, जिसने सिंचाई व्यवस्था सुधारने और उत्पादन बढ़ाने के सरकारी प्रयासों के बावजूद केसर की खेती को लगातार अप्रत्याशित बना दिया है.

कश्मीरी केसर मुख्य रूप से दो श्रेणियों में बेचा जाता है. पहला ‘मोंगरा’ (Mongra), जो अपनी तीखी खुशबू और गहरे रंग के लिए जानी जाने वाली प्रीमियम पूरी तरह से लाल वैरायटी है. दूसरा ‘लच्छा’ (Lacha), जिसमें लाल धागों के साथ-साथ पीले रंग के धागों का एक छोटा हिस्सा शामिल होता है.

उत्पादकों के अनुसार, हाल के महीनों में दोनों वैरायटी की कीमतों में काफी बढ़ोतरी हुई है. मजीद ने कहा कि प्रीमियम मोंगरा केसर को वर्तमान में लच्छा की तुलना में 40 से 50 रुपये प्रति ग्राम अधिक मिल रहे हैं, जो इसकी मजबूत मांग और सीमित उपलब्धता को दर्शाता है. उन्होंने कहा, “जो केसर एक साल पहले करीब 2.5 लाख रुपये प्रति किलोग्राम बिक रहा था, उसके दाम अब 30-40% अधिक मिल रहे हैं.”

व्यापारी बताते हैं कि स्टॉक घटने और नई खरीद की लागत बढ़ने के कारण थोक कीमतों में लगातार बढ़ोतरी हुई है. बाजार की स्थिति पर नजर रखते हुए कुछ खुदरा विक्रेताओं ने कम मात्रा में खरीदारी शुरू कर दी है. केसर की कीमतों में इस बढ़ोतरी का असर फूड प्रोसेसिंग, कन्फेक्शनरी, हॉस्पिटैलिटी, फार्मास्यूटिकल्स और कॉस्मेटिक्स सहित कई उद्योगों पर पड़ने की आशंका है.

मिठाइयों और पारंपरिक खाद्य उत्पादों के निर्माता, विशेष रूप से त्योहारों और शादियों के सीजन से पहले, बाजार के रुझानों पर करीब से नजर रख रहे हैं. उद्योग के प्रतिनिधियों का कहना है कि मांग अभी भी अपेक्षाकृत स्थिर बनी हुई है क्योंकि केसर का उपयोग कम मात्रा में किया जाता है. लेकिन, कीमतों में लगातार होने वाली यह बढ़ोतरी अंततः उपभोक्ताओं के खरीदारी के फैसलों को प्रभावित कर सकती है.

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दिल्ली के एक केसर व्यापारी राजेश कुमार ने कहा कि कश्मीर और ईरान दोनों जगहों से होने वाली सप्लाई एक साथ कम हो गई है, जिससे एक ऐसी असामान्य स्थिति पैदा हो गई है जहां खरीदार सीमित स्टॉक के लिए आपस में होड़ कर रहे हैं. उन्होंने रेखांकित किया कि बाजार ने पिछले कई महीनों में कीमतों पर लगातार बढ़ता हुआ दबाव देखा है.

उत्पादकों और व्यापारियों को उम्मीद है कि आने वाले समय में केसर की कीमतें मजबूत बनी रहेंगी. मजीद ने कहा कि कश्मीर में कम उत्पादन और ईरान में सप्लाई की चिंताओं ने मिलकर बाजार में किल्लत पैदा कर दी है. उन्होंने आगे कहा कि जब तक उत्पादन में सुधार नहीं होता और अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन स्थिर नहीं होती, तब तक कीमतों में बड़ी राहत मिलने की संभावना नहीं है

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